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इंदिरा प्रियदर्शनी बैंक घोटाले के एक प्रकरण में 15 से अधिक आरोपित बनाए गए है, इसमें से तीन आरोपित फरार और 12 आरोपित जमानत पर रिहा है। दो आरोपित ही कोर्ट पेशी में उपस्थित होते हैं जबकि 10 अन्य आरोपित बीमारी का बहाना बनाकर सुनवाई में कभी नहीं आते है।

HIGHLIGHTS

  1. 2006 में इंदिरा प्रियदर्शनी बैंक में 54 करोड़ रुपए से ज्यादा का घोटाला हुआ था।
  2. 30 हजार खाते धारकों की बैंक में जमा रकम डूब गए थे।
  3. बैंक के खाते धारकों को रकम लौटाने के लिए उनकी सूची बनाई जा रही है।

भाजपा शासन काल में वर्ष 2006 में हुए 17 साल पुराने इंदिरा प्रियदर्शनी बैंक घोटाला मामले के आरोपितों की लंबे समय से कोर्ट में पेश नहीं होने पर न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) भूपेश कुमार बसंत ने नोटिस जारी किया है। समझा जा रहा है कि कोर्ट ने जमानत पर रिहा दस आरोपितों की जमानत खारिज करने की पूरी तैयारी कर ली है।

संदीप कुमर दुबे ने बताया कि इंदिरा प्रियदर्शनी बैंक घोटाले के एक प्रकरण में 15 से अधिक आरोपित बनाए गए है, इसमें से तीन आरोपित फरार और 12 आरोपित जमानत पर रिहा है। इस प्रकरण की सुनवाई के दौरान केवल दो आरोपित ही कोर्ट पेशी में उपस्थित होते हैं जबकि 10 अन्य आरोपित बीमारी का बहाना बनाकर सुनवाई में कभी नहीं आते है। पिछले 12 साल से यह सिलसिला चल रहा है।

बैंक घोटाले के आरोपितों को सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट द्वारा इस शर्त पर जमानत दी गई है कि वह कोर्ट में नियमित सुनवाई के दौरान उपस्थित रहेंगे। वहीं पुलिस को जांच में सहयोग करेंगे। न्यायाधीश ने अभियोजन पक्ष की दलील को गंभीरता से सुनने और अदालत की अवहेलना करने पर सभी आरोपितों को एक आखिरी मौका देते हुए नोटिस जारी किया है। जारी नोटिस में पूछा गया है कि कौन सी बीमारी है जिसके कारण वह सुनवाई में उपस्थित नहीं हो रहे है। इसे स्पष्ट करने के लिए मेडिकल बोर्ड के प्रमाण के साथ ही उपस्थित दर्ज कराएं।

ये है आरोपित

इदिरा प्रियदर्शनी बैंक मैनेजर उमेश सिन्हा, उपाध्यक्ष सुलोचना आडिल, किरण शर्मा, दुर्गा देवी, सविता शुक्ला, सरोजनी शर्मा, नीरज जैन, रीता तिवारी, संगीता शर्मा एवं अन्य शामिल हैं। इनमें से केवल उमेश सिन्हा और सुलोचना आडिल कोर्ट में उपस्थित होते हैं। वहीं अन्य आरोपितों की ओर से उनके अधिवक्ताओं द्वारा धारा 317 दप्रस के तहत आवेदन पेश किया जाता है। इसमें बीमार होने के कारण अपने पक्षकार को उपस्थित होने में असमर्थ बताया जाता है।

यह है मामला

2006 में इंदिरा प्रियदर्शनी बैंक में 54 करोड़ रुपए से ज्यादा का घोटाला हुआ था। इसमें 30 हजार खाते धारकों की बैंक में जमा रकम डूब गए थे। इस दौरान तत्कालीन राज्य सरकार ने कोई सख्ती नहीं बरती जिसके चलते किसी भी खाताधारक को रकम वापस नहीं मिली। वर्ष 2018 में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद बैंक घोटाले की जांच करने के आदेश दिए गए।

इसके बाद कोर्ट और पुलिस ने इसमें शामिल सभी आरोपितों को नोटिस जारी किया। इसकी तामिली होते ही बैंक में फर्जी दस्तावेज के आधार पर क्रेडिट लेने वाले चार कारोबारियों ने 1.43 करोड़ 50 हजार रुपए जमा कराया है। गौरतलब है कि बैंक से लोन लेने वालों में छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की 35 कंपनिया शामिल हैं।

खाताधारकों की बन रही सूची, लौटाया जायेगा पैसा

विशेष लोक अभियोजक संदीप दुबे ने बताया कि बैंक के खाते धारकों को रकम लौटाने के लिए उनकी सूची बनाई जा रही है। इसमें ब्योरा जुटाया जा रहा है कि इस समय कितने खाताधारक जीवित है और कितने की मृत्यु हो चुकी है। उनके नामिनी और जमा रकम की जानकारी एकत्रित की जा रही है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी घोषणा की है कि बैंक के सभी खाताधारकों को उनकी रकम लौटाई जाएगी।

दरअसल छत्तीसगढ़ शासन के उप महाअधिवक्ता संदीप दुबे ने बैंक घोटाले से जुड़े आरोपितों द्वारा स्वास्थ्यगत कारण बताकर जमानत का लाभ लेने पर कोर्ट में आवेदन दिया है। उन्होंने आरोपितों की जमानत को निरस्त करने के साथ ही जिला मेडिकल बोर्ड से जांच रिपोर्ट पेश करने की मांग की है। कोर्ट ने आरोपितों को इस संबंध में नोटिस जारी कर नियमित पेशी पर आने के निर्देश दिए है ताकि घोटाले की जांच-पड़ताल में रफ्तार आ सके।