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राज्य उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति गौतम चौरड़िया ने मृतक की नामिनी पत्नी को बीमित राशि 15 लाख रुपये छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ वाद व्यय तीन हजार रुपये देने का आदेश सुनाया।

छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने टाटाएआइजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड मुंबई के विरुद्ध पेश प्रकरण में पाया कि ओनर कम ड्राइवर बीमा कवर के अंतर्गत बीमा दावा राशि का भुगतान न कर बीमा कंपनी ने सेवा में कमी की है। ऐसे में आयोग ने बीमा कंपनी को ओनर कम ड्राइवर बीमा कवर के लिए 15 लाख रुपये ब्याज समेत भुगतान करने का आदेश दिया है।

दरअसल कबीरधाम निवासी सुचि प्रभा शर्मा के पति सूर्यकांत शर्मा ने अपनी मोटर साइकिल क्रमांक सीजी 07 एई 0935 का बीमा टाटाएआइजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से संपूर्ण जोखिम के लिए 31 अगस्त, 2021 से 30 अगस्त, 2022 तक की अवधि के लिए कराया था,
जिसमें ओनर कम ड्राइवर के लिए 15 लाख रुपये का बीमा कवर था। 10 मार्च, 2022 को मोटरसाइकिल सवार सूर्यकांत शर्मा को अन्य वाहन ने ठोकर मार दी थी। इस हादसे में उन्हें गंभीर चोट आई थी।
अस्पताल में इलाज के दौरान दूसरे दिन उनकी मौत हो गई। पति की मौत के बाद सुचि प्रभा शर्मा ने बीमा दावा कंपनी को भेजा, किंतु बीमा कंपनी ने दावा राशि का भुगतान नहीं किया। इससे क्षुब्ध होकर पीड़िता ने सेवा में कमी का आरोप लगाते हुए जिला उपभोक्ता आयोग कबीरधाम में परिवाद प्रस्तुत किया।
बीमा कंपनी ने आयोग के सामने यह पक्ष रखा कि यदि वाहन बीमित थी और बीमा में पीए कवर की कोई शुल्क अदा किया गया था तो नामिनी को सीधे बीमा कार्यालय को सूचना देनी चाहिए और बीमा अधिनियम के तहत समस्त औपचारिक दस्तावेज और अन्य वांछित दस्तावेजमय पूर्ण चालान शीट के बीमा कंपनी को देना चाहिए था, किंतु पीड़िता ने ऐसा कुछ भी नहीं किया है और सीधे परिवाद पेश कर दिया।
यह किसी भी दशा में स्वीकार योग्य नहीं है। जिला आयोग ने पेश परिवाद को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए पीडिता को क्षतिपूर्ति राशि सात लाख तीन हजार छह सौ छत्तीस रुपये और उस राशि पर दावा तीन जनवरी, 2023 से भुगतान दिनांक तक छह प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज, वाद व्यय के रूप में तीन हजार रुपये भुगतान करने का आदेश सुनाया।

राज्य आयोग से मिला न्याय

जिला उपभोक्ता आयोग के इस फैसले से असंतुष्ट होकर सुचि प्रभा शर्मा ने राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील पेश की। आयोग ने सुनवाई के दौरान पेश किए गए दस्तावेजों के आधार पर यह पाया कि प्रश्नाधीन बीमा पालिसी में कंपलसरी पीए
कवर (ओनर कम ड्राइवर) के लिए तीन सौ रुपये का प्रीमियम लिया गया है और ओनर कम ड्राइवर के लिए 15 लाख रुपये का बीमा कवर था। दुर्घटनाग्रस्त दोपहिया वाहन के पंजीकृत स्वामी सूर्यकांत शर्मा ही उस उक्त वाहन चला रहे थे। उनके पास वैध एवं प्रभावी ड्राइविंग लाइसेंस था।
दुर्घटना में आई चोट के कारण अस्पताल में उनकी मौत हुई। बीमा पालिसी के किसी नियम, शर्त का उल्लंघन करना बीमा कंपनी की ओर से आयोग में प्रमाणित नहीं किया जा सका।
ऐसे में राज्य उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति गौतम चौरड़िया ने मृतक की नामिनी पत्नी को बीमित राशि 15 लाख रुपये छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ वाद व्यय तीन हजार रुपये देने का आदेश सुनाया।