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चुनावी महासमर में इस वर्ष आस्था और भक्ति का रंग सर चढ़कर बोलेगा। कृष्ण जन्माष्टी से लेकर गणेश चतुर्थी, दुर्गा नवमी, दशहरा, दीवाली तक यह सिलसिला लगातार चलेगा।

HIGHLIGHTS

  1. चुनावी महासमर में इस वर्ष आस्था और भक्ति का रंग सर चढ़कर बोलेगा
  2. आस्था और भक्ति की चौखट पर सियासत, बिकेगी 200 करोड़ की मूर्तियां
  3. भक्ति और आस्था के रंग के जरिए सियासतदारों का लक्ष्य लोगों को साधना

चुनावी महासमर में इस वर्ष आस्था और भक्ति का रंग सर चढ़कर बोलेगा। कृष्ण जन्माष्टी से लेकर गणेश चतुर्थी, दुर्गा नवमी, दशहरा, दीवाली तक यह सिलसिला लगातार चलेगा। इसका अंदाजा इन आंकड़ों से लगाया जा सकता है कि इस वर्ष गणेश और दुर्गा प्रतिमाओं की रिकार्ड बुकिंग हो चुकी है। भक्ति और आस्था के रंग के जरिए सियासतदारों का लक्ष्य लोगों को साधना और समर्थन प्राप्त करना भी है।

चुनाव के नजदीक आते ही आरोप-प्रत्यारोप और जिंदाबाद के नारों के साथ ही गलियों और सड़कों में भक्ति की गूंज भी दूर तक सुनाई देगी। छत्तीसगढ़ मूर्तिकार-चित्रकार संघ के मुताबिक गणेश और दुर्गा प्रतिमाओं का कारोबार प्रदेशभर में प्रतिवर्ष 30 से 50 करोड़ रहता है, लेकिन इस वर्ष चुनावी साल में यह व्यवसाय लगभग 200 करोड़ रुपये से आस-पास रहने की संभावना है।

समितियों को जमकर मिलेगी राजनीतिक पार्टियों की फंडिंग

जनप्रतिनिधि भी इस बार खुलकर खर्चा करने का मन बना चुके हैं। इसकी वजह से समितियों को राजनीतिक पार्टियों की फंडिंग भी जमकर मिलेगी। झांकियों में भी भव्यता नजर आने वाली है। राजनीतिक पार्टियां इस बात को बखूबी समझती है कि आस्था और भावनाओं को जोड़कर लोगों के दिलों में जगह बनाई जा सकती है, लिहाजा पंडालों के आस-पास इस बार ज्यादा से ज्यादा मंच बनाए जाएंगे।

यहां जनप्रतिनिधियों का आना-जाना लगा रहेगा। शहर में कई ऐसे स्थान तय किए जा रहे हैं, जहां चुनावी साल में पहली बार मूर्तियों की स्थापना होगी। गणेश चतुर्थी के 11 दिन और दुर्गा नवमी के नौ दिनों तक भक्ति का रंग यादगार रहने वाला है। मूर्तियों की स्थापना से लेकर विसर्जन को लेकर बड़ी तैयारियां प्रदेशभर में देखी जाएगी।

मूर्तियों में दिखेगा छत्तीसगढ़ियां रंग

पंडालों में जिस तरह से मूर्तियां बनाई जा रही है कि इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि गणेश और दुर्गा प्रतिमाओं का रंग भी छत्तीसगढ़ियां रंग में रंगने वाला है। समितियों की ओर से थीम बताकर प्रतिमाएं बनाई जा रही है, जिसमें गणेश जी को किसान और मां दुर्गा को कई समितियों ने छत्तीसगढ़ महतारी के स्वरूप में उकेरने का निवेदन किया है।

मूर्तिकारों ने भी मांग के अनुरूप मूर्तियों का मूर्तरूप देना शुरू कर दिया है। इस बार झांकियों में भी खेत,खलिहान, तीज-त्यौहार और छत्तीसगढ़ी कला और संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी। इसरो के चंद्रयान और आदित्य एल-1 अभियान की कामयाबी भी झांकियों में नजर आने वाली है।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए पहुंचेंगे जनप्रतिनिधि

इस धार्मिक उत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए जनप्रतिनिधि लोगों से रू-ब-रू होंगे। इसके लिए प्रदेशभर के कला, संस्कृति और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए टीमों से बातचीत शुरू हो चुकी है। रायपुर,दुर्ग,-भिलाई, बिलासपुर, कोरबा, धमतरी, रायगढ़, राजनांदगांव, जगदलपुर,अंबिकापुर आदि शहरों में गरबा उत्सव अलग रंग मंें दिखेगा। इवेंट की फंडिंग के लिए राजनीतिक पार्टियां आगे आ रही है।

छत्तीसगढ़ मूर्तिकार-चित्रकार संघ के अध्यक्ष देवानंद साहू ने कहा, इस वर्ष मूर्तियों की रिकार्ड बुकिंग आ रही है। यूं तो हर वर्ष उत्साह चरम पर रहता है, लेकिन इस वर्ष प्रदेशभर में 50 लाख से अधिक मूर्तियों के उठाव की संभावना है। इसका असर मूर्तिकारों के व्यवसाय पर पड़ेगा। कोरोनाकाल के घाटे के बाद यह दौर राहत वाला है।

नवा रायपुर निमोरा मूर्तिकार पीलूराम साहू ने कहा, चुनावी साल में इस बार मूर्तियों की थीम में कई बदलाव देखा जा रहा है। लोगों की विशेष डिमांड आ रही है। ज्यादातर गणेश जी मूर्तियों में नवाचार होता है। इस बार कई पंडालों में उनका भव्य स्वरूप देखने का मिलेगा। डिमांड काफी आ रही है। एडवांस बुकिंग में तेजी है।

फैक्ट फाइल

माना (रायपुर) व थनौद (दुर्ग) में मूर्ति कारखाना-80

मूर्तिकार संघ के सदस्य-12,000

प्रदेश में मूर्ति कला केंद्र- लगभग एक लाख

प्रदेशभर में विराजित होने वाली मूर्तियां- 50 से 60 लाख

(नोट-आंकड़े मूर्तिकार संघ से मिली जानकारी के मुताबिक आंकड़ों में फेरबदल संभव)