Treatments of lotus dental clinic birgaon

प्रदेश का पहला हेल्थ कॉल सेंटर हुआ बंद:कर्मचारी स्थानीय बोली में गर्भवती महिलाओं से करते थे बात; स्थानीय युवा भी हुए बेरोजगार

दंतेवाड़ा13 दिन पहले

 

अब हेल्थ कॉल सेंटर में ताला जड़ा हुआ है। - Dainik Bhaskar

अब हेल्थ कॉल सेंटर में ताला जड़ा हुआ है।

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के मकसद से खोला गया प्रदेश का पहला हेल्थ कॉल सेंटर अब बंद हो गया है। करीब सालभर तक इस सेवा का लाभ नक्सल प्रभावित इलाके की महिलाओं को मिला था। जिसके बाद अब कुछ सालों से इस हेल्थ कॉल सेंटर में ताला जड़ा हुआ है।

इसके साथ ही अलग-अलग नक्सल प्रभावित गांवों में स्थापित किए गए प्री बर्थ वेटिंग रूम की सुविधा भी गर्भवती महिलाओं को नहीं मिल रही है। दरअसल, दंतेवाड़ा जिले के तात्कालीन कलेक्टर दीपक सोनी ने जावंगा एजुकेशन सिटी में इसकी शुरुआत की थी।

इस कॉल सेंटर की खास बात थी कि, यहां काम करने वाले कर्मचारी स्थानीय बोली हल्बी और गोंडी में गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों से संवाद करते थे। महिलाओं के प्रसव की तारीख नजदीक आते ही उन्हें एक सप्ताह पहले से ही कॉल करना शुरू किया जाता था। उनका हाल जानते थे।

हेल्थ कॉल सेंटर कैसे करता था काम

गांव तक एम्बुलेंस भेजकर गर्भवती महिलाओं को नजदीक के अस्पताल लेकर आते थे। जहां प्री बर्थ वेटिंग रूम में उन्हें रखा जाता था। प्रसव से पहले गर्भवती महिला की देखभाल, पौष्टिक आहार सब स्वास्थ्य विभाग करता था। जिला प्रशासन का मकसद सिर्फ संस्थागत प्रवास बढ़ाना और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना था। इस प्रोजेक्ट के नोडल अधिकारी रहे अंकित सिंह ने कहा, इसके लिए अब फंडिंग की सुविधा नहीं है। इसलिए अब इस हेल्थ कॉल सेंटर को बंद कर दिया गया है।

युवाओं को मिला था रोजगार

इस कॉल सेंटर में काम करने के लिए BPO कॉल सेंटर के साथ जिला प्रशासन ने MOU भी किया था। शुरुआत में करीब 4 से 5 कर्मचारी इस कॉल सेंटर में काम करते थे। उन्हें करीब 7 से 8 हजार रुपए दिए जाते थे। हालांकि, कुछ दिन बाद यह संख्या बढ़ गई थी। जिला प्रशासन की इस पहल से जहां गर्भवती महिलाओं को इलाज मिलता था। वहीं नक्सलगढ़ के स्थानीय युवाओं को रोजगार मिला था।

इस काम को शुरू करने से पहले युवाओं को ट्रेनिंग दी गई थी।
इस काम को शुरू करने से पहले युवाओं को ट्रेनिंग दी गई थी।

अब दंतेवाड़ा जिला प्रशासन की टीम इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। यही वजह है कि, अंदरूनी इलाके की गर्भवती महिलाओं को प्रसव की तारीख पता न हो तो प्रसव पीड़ा होने के बाद अस्पताल के लिए निकलते हैं। गर्भवती महिलाओं को खाट के सहारे लेकर आते हैं। यदि किसी गांव तक एम्बुलेंस की सुविधा हो तो उसके माध्यम से भी लाया जाता है। अस्पताल पहुंचने से पहले ही बीच रास्ते में महिला का प्रसव होने के भी मामले सामने आए हैं।

प्रदेश का पहला हेल्थ कॉल सेंटर था ​​​​​

स्थानीय बोली में शुरू हुआ यह प्रदेश का पहला हेल्थ कॉल सेंटर था। जिसे मॉडल के रुप में देखा जा रहा था। बस्तर के अन्य जिलों में भी इसी प्रोजेक्ट के तहत काम करने की तैयारियां की जा रही थी।