छत्तीसगढ़ में पांच हजार गौशालाओं के शुरू होने के बाद साढ़े चार लाख लोगों को मिलेगा रोजगार

  • आजीविका केंद्र के रूप में विकसित होंगे गौठान, अब सड़कों पर नजर नहीं आएंगे आवारा मवेशी
  • शहरों की व्यवस्था का जिम्मा नगरीय प्रशासन विभाग को

26 june 2020,

City News – CN      City news logo

रायपुर | ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश के पांच हजार गांवों में गौठानों का निर्माण कर रही है। इन सभी गौठानों के बन जाने से राज्य के लगभग साढ़े चार लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। गुरुवार को सीएम भूपेश बघेल गोधन न्याय योजना की घोषणा करते हुए यह बात कही।

उनका कहना था कि  इसके साथ ही सड़कों पर घूमने वाले आवारा मवेशियों से जल्द ही छुटकारा मिलने की संभावना है। वहीं उपयोग करने के बाद मवेशियों को छोड़ने वाले पशुपालक भी अब उन्हें अपने साथ रखेंगे। इस योजना के शुरु होते ही गौठानों की रौनक भी लौट जाएगी।

मुख्यमंत्री ने योजना के बारे में पत्रकारों को बताया कि इन गौठानों को हम आजीविका केन्द्र के रूप में विकसित कर रहे हैं। यहां बड़ी मात्रा में वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण भी महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से शुरू होगा।

 मुख्यमंत्री ने कहा कि गोबर खरीदी से लेकर उसके वित्तीय प्रबंधन एवं वर्मी कम्पोस्ट के उत्पादन से लेकर उसके विक्रय तक की प्रक्रिया के निर्धारण के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रमुख सचिवों एवं सचिवों की एक कमेटी गठित की गई है।

इस अवसर पर कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे, गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू, वन मंत्री मोहम्मद अकबर, सहकारिता मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया,पीएचई मंत्री गुरू रूद्र कुमार, राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल सीएम के सलाहकार प्रदीप शर्मा, रूचिर गर्ग, सीएस आरपी मण्डल,एसीएस अमिताभ जैन, सुब्रत साहू, सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. एम गीता सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। 

राज्य में खुले में चराई की परंपरा, इस योजना से बदलेगी तस्वीर 

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य में खुले में चराई की परंपरा रही है। इससे पशुओं के साथ-साथ किसानों की फसलों का भी नुकसान होता है। शहरों में आवारा घूमने वाले मवेशियों से सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिससे जान-माल दोनों का नुकसान होता है।

अभी गाय पालक दूध निकालने के बाद उन्हें खुला छोड़ देते हैं। लेकिन इस योजना के लागू होने के बाद से यह स्थिति पूरी तरह बदल जाएगी। पशु पालक अपने पशुओं के चारे-पानी का प्रबंध करने के साथ-साथ उन्हें बांधकर रखेंगे, ताकि उन्हें गोबर मिल सके, जिसे वह बेचकर आर्थिक लाभ प्राप्त कर सके।

वर्मी कम्पोस्ट से जैविक खेती की ओर बढ़ेंगे राज्य के किसान

मुख्यमंत्री ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि इस योजना से हर गोपालक के लिए अतिरिक्त आमदनी सृजित होगी। इस योजना के क्रियान्वयन के लिए पूरा एक सिस्टम काम करेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्मी कम्पोस्ट के जरिए हम जैविक खेती की ओर बढेंगे। इसका बहुत बड़ा मार्केट उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि गोधन न्याय योजना के माध्यम से तैयार होने वाली वर्मी कम्पोस्ट खाद की बिक्री सहकारी समितियों के माध्यम से होगी।

राज्य में किसानों के साथ-साथ वन विभाग, कृषि, उद्यानिकी, नगरीय प्रशासन विभाग को पौधरोपण एवं उद्यानिकी की खेती के समय बड़ी मात्रा में खाद की आवश्यकता होती है। इसकी आपूर्ति इस योजना के माध्यम से उत्पादित खाद से हो सकेगी। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त जैविक खाद की मार्केटिंग की व्यवस्था भी सरकार करेगी।

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