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छत्तीसगढ़ में पहली बार हुआ टिडि्डयों का हमला, 50 हजार हेक्टेयर में जंगल को हुआ नुकसान

  • एक लाख लीटर स्प्रे से लाखों की तादात में मरी टिडि्डयां दो भाग में बंटा दल, एक खारा में तो दूसरा बोड़ला में
  • विशेषज्ञों के अनुसार खारा के जंगल में अलग-अलग टुकड़ियों में 12 से 15 करोड़ टिड्‌डी पहुंचे, 5 वर्ग किमी में फैले

18 june 2020

City News – CN      City news logo

कवर्धा/रेंगाखार जंगल/चिल्फीघाटी | मध्यप्रदेश की ओर से टिडि्डयों के एक दल ने कबीरधाम जिले में धावा बोल दिया। यह एक दिन पहले बालाघाट के साल्हेटेकरी इलाके से चिल्फी के जंगल के रास्ते कबीरधाम जिले में घुसा। इसके बाद यह खारा बोड़ला ब्लॉक के खारा-कोयलारझोरी के जंगल की ओर आगे बढ़ा।

रात भर इसने खारा के जंगल को अपना ठिकाना बनाया और सुबह से दोपहर तक यहीं बने रहे। वन विभाग के एसडीओ सिदार के मुताबिक टिडि्डयों ने खारा में 50 हेक्टेयर के जंगल को नुकसान पहुंचाया है। ये टिड्‌डे उड़ते हुए देर शाम बोड़ला जा पहुंचे और अंधेरा होने तक उड़ते रहे।

मंगलवार को टिडि्डयों के कबीरधाम प्रवेश की सूचना मिलते ही कृषि विभाग अलर्ट हो चुका था। विभाग से टिडि्डयों को भगाने के लिए कृषि विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर आरके राठौर को मौके पर भेजा गया। कबीरधाम के डीडीए मोरध्वज डड़सेना, राजनांदगांव के डीडीए टीकम सिंह व बेमेतरा के डीडीए खारा जंगल में अपनी पूरी टीम के साथ पहुंचे।

फायर ब्रिगेड ने 1 लाख लीटर केमिकल छिड़का

बुधवार सुबह 8 बजे से कबीरधाम-राजनांदगांव व बेमेतरा जिले की ज्वाइंट टीम ने लगभग 6 घंटे टिड्‌डी भगाने का काम किया।  तीनों जिले के 7 फायर ब्रिगेड की गाड़ियों के साथ 4 पावर स्पेयर से लैमडा साइहैलोथीन केमिकल का छिड़काव करते रहे। इस दौरान 160 लीटर केमिकल को प्रति डेढ़ एमएल में एक लीटर पानी की मात्रा के हिसाब से छिड़काव किया गया। लाखों टिडि्डयां मरी हुई नजर आईं। 

यह है सबसे बड़ा खतरा 

खतरा 1. कीट विज्ञानियों के मुताबिक एक टिड्‌डी नमी के सीजन में 24 घंटे में 3 बार अंडे देती है। यह अंडे वह जमीन से 5 से 6 इंच भीतर देती है। वर्तमान में खेतों की जोताई हो रही है। ऐसे में भुरभुरी मिट्‌टी उनके लिए अनुकूल है। यह स्थिति किसानों के लिए अच्छी नहीं है। टिड्‌डी एक बार में 200 से 250 अंडे देती है। इनमें से 70 से 80 तक टिड्‌डे बाहर आते हैं। यदि ऐसा हो गया तो यह बड़ा नुकसानदेह होगा। 

खतरा 2. हवा की दिशा के आधार पर ये टिड्‌डी आगे बढ़ते हैं। यदि ये किसी स्थान पर ठहर गए, तो वहां नुकसान होना तय है। ऐसे में इनका उड़ते रहना जरूरी है। फिलहाल हवा की दिशा दक्षिण-पश्चिमी से पूर्व-उत्तर की ओर है। ऐसे में ये उड़कर पंडरिया, लोरमी, अचानकमार के जंगल, मुंगेली व बिलासपुर जिले की ओर बढ़ेंगी। यह स्थिति छत्तीसगढ़ के लिए अच्छी नहीं है। 

कबीरधाम की सीमा के पास आकर फिर वापस गए थे 

28 मई – बालाघाट जिले के वारासिवनी तहसील क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कासपुर, मदनपुर में रहा टिड्‌डी दल। 
29 मई – मंडला जिले में प्रवेश किया, लेकिन शाम के समय एमपी के सिवनी जिले से पन्ना की ओर रवाना हो गए। 
09 जून- इस दिन फिर से टिड्डी दल मंडला व बालाघाट जिले के बार्डर पर पहुंचा। इन दोनों जिले के कई हिस्साें में 11 जून तक रहे। 
11 जून- मंडला से होते हुए डिंडौरी जिले में प्रवेश किए। ऐसा पहली बार हुए कि यह दल मंडला से डिंडौरी जिले में प्रवेश किया। डिंडौरी जिले में ये दल 13 जून तक सक्रिय रहा। 
14 जून – डिंडौरी जिले में राहत की बात रही कि टिड्डी दल अलग-अलग टुकड़ों में बंट गया। कुछ टिड्डी शहडोल की ओर निकले। वहीं कुछ डिंडाैरी जिले के हरराटोला व राई के जंगल में 15 जून तक रुके रहे। 
16 जून – मंगलवार देर शाम को बालाघाट जिले के जंगलों में सक्रिय रहे टिड्डी दल ने चिल्फीघाटी से कबीरधाम जिले में प्रवेश किया। ये यहां से रेंगाखार-खारा की ओर बढ़े। 

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