बड़ी खबर : आयुष्मान कार्ड से अब निजी अस्पतालों में नहीं करा सकते सिजेरियन डिलीवरी ; पढ़ें पूरी खबर

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हड़ताल पर नर्सों के जाने की वजह से मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल प्रबंधन ने गर्भवतियों को भर्ती लेना बंद कर दिया है और इन्हें दूसरे अस्पताल जाने की सलाह दी जा रही है। मजबूरी में परिजन नजदीक के निजी अस्पताल में भर्ती कराने लेकर जा रहे हैं पर यहां पता चल रहा है कि अब आयुष्मान कार्ड से सिजेरियन डिलीवरी नहीं हो सकती।

केन्द्र सरकार ने इस योजना से सिजेरियन डिलीवरी के लिए निजी अस्पतालों के लिए तय पैकेज को हटा दिया है। नॉर्मल डिलीवरी का पैकेज पहले से ही नहीं है। ऐसे में गर्भवतियों को निजी अस्पताल से भी मायूस लौटना पड़ रहा है। यही वजह है कि प्रसव के ज्यादातर केस जिला अस्पताल या फिर अन्य सरकारी अस्पताल में पहुंच रहे हैं।

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हड़ताल के चलते पहले से मुसीबत झेल रहे हैं और अब सिजेरियन डिलीवरी के लिए निजी अस्पतालों का पैकेज हटा दिए जाने से परेशानी डबल हो गई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से आयुष्मान कार्ड से इलाज के लिए जिले में 26 निजी अस्पतालों को चिह्नांकित किया है। इन अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड जमा करने पर सिजेरियन डिलीवरी कराई जा रही थी।

अभी स्थिति स्पष्ट नहीं

पहले इमरजेंसी में आयुष्मान कार्ड के माध्यम से गर्भवतियों को निजी अस्पताल में भर्ती कराकर सिजेरियन डिलीवरी करा ली जा रही थी, लेकिन केन्द्र सरकार की ओर से 17 अगस्त से पैकेज हटा दिया गया है। खबर है कि राज्य सरकार की ओर से केन्द्र सरकार को पत्र लिखकर सिजेरियन डिलीवरी के पैकेज को फिर जारी करने मांग की है पर अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है।

समझाइश के बाद भी नहीं माने

मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल प्रबंधन की ओर से हड़ताल में गई नर्सों को वापस बुलाने के लिए पत्र जारी किया पर नर्सेस नहीं आईं और हड़ताल के समर्थन में डटी हुई हैं। प्रबंधन ने विकल्प के रूप में नर्सिंग कॉलेज की छात्राओं को बुलाया है पर ये अनुभवी नहीं हैं। इधर जिला अस्पताल प्रबंधन को रोज 8 से 10 सिजेरियन डिलीवरी करनी पड़ रहा है। यहां का वर्क लोड बढ़ गया है। निजी अस्पताल में कार्ड से सुविधा नहीं मिलने से सारे केस यहीं पहुंच रहे हैं।

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नवजात शिशुओं को रेफर कर रहे

एमसीएच में एसएनसीयू में भर्ती नवजात शिशुओं को भर्ती नहीं लिया जा रहा है। गंभीर शिशुओं को रायपुर रेफर किया गया है। वहीं अन्य को जिला अस्पताल में शिफ्ट किए हैं पर यहां भी केवल 18 बेड हैं। इसलिए क्रिटिकल कंडीशन वाले नवजात शिशुओं को सीधे मेकाहारा भेजा जा रहा है। सिविल सर्जन डॉ केके जैन ने बताया कि सिजेरियन डिलीवरी के केस यहीं निपटाए जा रहे हैं। गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं को बेड की कमी के चलते मेकाहारा भेज रहे हैं।

प्रबंधन ने हाथ खड़े कर दिए

ब्लॉक स्तर से सिजेरियन वाले केस को जिला मुख्यालय रेफर कर दिया जाता है। मेडिकल कॉलेज या फिर जिला अस्पताल में ऐसे केस हैंडल हो जाते हैं। परिजन कार्ड में नि:शुल्क इलाज होने की वजह से निजी अस्पताल भी जाते हैं पर जब से नर्सेस हड़ताल में गई हैं तब से एमसीएच प्रबंधन ने डिलीवरी के केस लेने से हाथ खड़े कर दिए। पूरे केस जिला अस्पताल में आ रहे हैं पर यहां भी डॉक्टर और नर्सेस की पहले से ही कमी है। इमरजेंसी में परिजन गर्भवतियों को निजी अस्पताल लेकर जा रहे हैं तो वहां से मायूस लौटना पड़ रहा है।