हर घर तिरंगा अभियान के लिए रायपुर में बन रहे हैं 60 हजार तिरंगे : रायपुर छेरीखेड़ी की महिलाएं निभा रही हैं जिम्मेदारी…

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हर घर तिरंगा अभियान पूरे देश में मनाया जा रहा है। आजादी के 75 सालों के जश्न को शानदार बनाएगा देश का राष्ट्रीय ध्वज। हर आम आदमी इसे देश की शान से जोड़कर देखता है। लोग अपने-अपने घरों में तिरंगा लगा सकें, इसलिए रायपुर की कुछ महिलाएं पूरी मेहनत के साथ लगी हुई हैं। हर दिन ये महिलाएं दो हजार से अधिक झंडे बना रही हैं।

रायपुर के छेरीखेड़ी गांव में कल्पतरू सेंटर में गांव की 30 महिलाएं झंडा बनाने का काम कर रही हैं। तीन रंगों के कपड़ों को जोड़कर देश की महानता का प्रतीक ध्वज तैयार किया जा रहा है। इन महिलाओं को 60 हजार झंडे बनाने का टारगेट मिला है। रायपुर के कलेक्टर डॉ सर्वेश्वर भूरे ने बताया कि जिला प्रशासन इन महिलाओं की मदद कर रहा है। 13 से 15 अगस्त तक हर घर तिरंगा अभियान चलाया जाएगा। जिसमें हर घर में लोग तिरंगा फहराएंगे।

तिरंगा तैयार करतीं महिलाएं।
तिरंगा तैयार करतीं महिलाएं।

मिली आर्थिक आजादी
तिरंगा तैयार करने का काम कर रही महिला ईश्वरी डहरिया ने बताया – पहले हमारे पास आय का कोई जरिया नहीं था। सिलाई काम तो सीखा मगर गांव में उतना काम नहीं था। शहर जाकर काम करते तो आने जाने में ही मेहताने के रुपए खर्च हो जाते। कोविड की वजह से परिवार में भी पैसे की समस्या थी। ये काम मिला तो हमें काफी सहारा मिला। 6 से 7 हजार रुपए परिवार में हम भी देती हैं, जिससे घर चलाने में काफी मदद मिलती है।

लगता है देश के लिए कुछ कर रहे
दीक्षा बंजारे हर रोज तिरंगा की सिलाई का काम करने आती हैं। दैनिक भास्कर को दीक्षा ने बताया कि मैंने कभी नहीं सोचा था कि सिलाई के मामूली काम से कभी कुछ ऐसा करने का मौका मिलेगा। आज यहां सभी दीदियों के साथ बैठकर हम सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक बिना थके तिरंगे पर काम कर रही हैं। इससे लगता है कि देश के लिए हम सामान्य महिलाएं भी कुछ कर रही हैं।

कलेक्टर ने शुरू किया स्टोर।
कलेक्टर ने शुरू किया स्टोर।

सेंटर शुरू
रायपुर के कलेक्टर डॉ सर्वेश्वर भूरे ने कलेक्टोरेट परिसर में तिरंगा स्टॉल का शुरू कर दिया है। इस स्टॉल से महिला समूहों द्धारा बनाए गए तिरंगा झंडे शहरवासी ले सकते हैं। उजाला ग्राम संगठन से जुड़ी महिला समूहों की दीदियां जो झंडे तैयार कर रही हैं। इसी काउंटर पर मिलेंगे। इसके अलावा सी मार्ट के साथ गांव-गांव की उचित मूल्य की राशन दुकानों पर भी झंडे भेजे जा रहे हैं।

दी गई ट्रेनिंग
सिलाई का काम जानने वाली इन महिलाओं को झंडा तैयार करने की ट्रेनिंग दी गई है। इन झंडों को बनाने के लिए माप की तकनीकी जानकारी और मार्गदर्शन जिला पंचायत के आजीविका मिशन से जुड़े अधिकारियों ने दिया है। यहां खादी और पॉलिस्टर कपड़े के झण्डे बन रहे हैं। तिरंगा झंडा बनाने के लिये खादी के कपड़े स्थानीय स्तर पर खादी ग्रामोउद्योग बोर्ड से खरीदे गए हैं और पॉलिस्टर का कपड़ा दूसरे कपड़ा मिलों से मंगाया गया है। झंडे बीस इंच ऊंचाई और 30 इंच चौड़ाई के साइज में बन रहे हैं।