रायपुर पुलिस कोरियर बॉय बनकर फिल्मी अंदाज में की कार्यवाही: रील लाइफ के एक्शन से पकड़े गए ठग; सरकारी डाटा चुराकर लोगों की जेब से पैसे हड़पता था…

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रायपुर पुलिस ने शातिर ठगों को फिल्मी अंदाज में गिरफ्तार किया है। रील लाइफ में दिखाए जाने वाले तरीकों से रियल लाइफ में आरोपियों को पकड़ लिया गया। जिस बदमाश को पुलिस ने गिरफ्तार किया है, वह सरकारी डाटा चुराकर लोगों की जेब से पैसे हड़पने का काम कर रहा था।

मामला ई-चालान की धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ है। दरअसल राज्य की पुलिस ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों को ई-चालान भेजती है। यानी डिजिटल तरीके से लोगों को जुर्माना देना होता है। इस प्रोसेस का डाटा चुराकर ठग अपने खातों में पैसे ट्रांसफर करवा रहे थे। रायपुर के एक शख्स के साथ इसी तरह से ठगी की गई। इस मामले की शिकायत मिलते ही पुलिस एक्शन में आई और दिल्ली जाकर एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है।

विभांशु और उसका साथी।
विभांशु और उसका साथी।

फोन पर धमकाकर वसूली

रायपुर के SSP प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि कुछ महीने पहले पुरानी बस्ती इलाके में रहने वाले हितेश कुमार को ई-चालान भेजा गया था। ठग ने अपने फोन नंबर 8745087152 और 8874635467 से हितेश काे कॉल करके धमकाया और अपने भेजे क्यू आर कोड में जुर्माने के 500 रुपए भेजने को कहा। हितेश ने वैसा ही किया।

स्टेट पुलिस की तरफ से आरटीओ द्वारा हितेश को दी जाने वाली सुविधाओं को ब्लॉक किया गया था. इधर फाइन देने के बाद भी जब सुविधाएं अन ब्लॉक नहीं हुईं, तो हितेश ने ट्रैफिक थाने में संपर्क किया और तब जाकर उसे खुद के साथ हुई ठगी का पता चला।

दिल्ली और यूपी गई पुलिस

ठगी का शिकार हुए हितेश ने जिस अकाउंट में पैसे भेजे, उससे जुड़े तमाम दस्तावेज और फोन नंबर ट्रांजैक्शन की जानकारी हासिल की गई। पुलिस को पता चला कि अकाउंट से जुड़े हुए कुछ नंबर और दस्तावेज दिल्ली और उत्तर प्रदेश के हैं। अलग-अलग जांच टीमें दिल्ली और उत्तर प्रदेश रवाना कर दी गई हैं। बैंक से जानकारी लेने पर रायपुर पुलिस की टीम को दिल्ली के तिलक नगर के एक ऑफिस की जानकारी मिली। यहां बाकायदा ठगी की कंपनी चल रही थी, जिसका नाम है वैल्यू सर्विसेज़ प्राइवेट लिमिटेड कंपनी। यहां से ठग कॉल सेंटर ऑपरेट कर रहे थे। इसके बाद पुलिस ने अपना एक्शन प्लान तैयार किया।

ये सामान ठगों के दफ्तर से मिले।
ये सामान ठगों के दफ्तर से मिले।

वेश बदलकर पहुंची पुलिस

रायपुर के SSP प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि इसके बाद पुलिस ने एक्शन प्लान तैयार किया। 10 लोगों की टीम दिल्ली में ही आम आदमी बनकर रहने लगी। 7 दिनों तक तिलक नगर के कॉल सेंटर के आसपास पुलिस के जवानों ने डेरा डाला। वे कोरियर बॉय बनकर कई बार उस दफ्तर में पार्सल लेकर पहुंचे. जब इस बात की तस्दीक हुई कि यहीं से रैकेट ऑपरेट हो रहा है, इसके बाद छापा मारा गया।

छापे की कार्रवाई में 2 युवक और 4 युवतियों को पकड़ा गया। आरोपियों के नाम विभांशु गर्ग, सुमित कुमार ठाकुर, नेहा शर्मा, रानी, सत्या और जन्नत अंसारी हैं। इस कॉल सेंटर का डायरेक्टर विभांशु नाम का शख्स है और इस ठगी के पूरे रैकेट का मास्टर माइंड भी वही है।

एजुकेटेड ठग

बीकॉम, एमकॉम, एमबीए, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में कोर्स ये सारी क्लासिफ़िकेशन ठग विभांशु के पास थीं। इससे पहले उसने टूर एंड ट्रैवल की कंपनी चलाई। सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, एप्लिकेशन डेवलपमेंट, वेबसाइट डेवलपमेंट, गूगल एडवर्ड्स, यूट्यूब प्रमोशन, कंटेंट राइटिंग, वर्चुअल नंबर और सोशल मीडिया प्रमोशन जैसे काम भी विभांशु कर चुका है। इन्हीं कामों के जरिए उसे लोगों को ठगने का आइडिया आया।

विभांशु को कुछ ऐसे लोग मिले जो डाटा चुराकर बेचते थे। इन्हीं चोरी किए हुए डाटा के जरिए विभांशु उत्तर प्रदेश, ओडिशा, हिमाचल जैसे कई राज्यों में लोगों को ठग चुका है। जिन आम लोगों को किसी सरकारी विभाग ने कोई चालान या डिजिटल चालान भेजा, उसकी जानकारी विभांशु की टीम को मिल जाती थी। कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर कॉल सेंटर से विभांशु के लिए काम करने वाली लड़कियां लोगों को फोन कर पैसे वसूलती थीं। अब रायपुर की पुलिस उन राज्यों को भी जानकारी दे रही है, जहां के लोगों को विभांशु ने ठगा। इसे डाटा किस तरह से और किस एजेंसी से मिलता था यह भी रायपुर पुलिस की जांच के दायरे में है।

ठगी का साजोसामान।
ठगी का साजोसामान।

ये सामान जब्त

पुलिस को आरोपियों के कॉल सेंटर से 25 कम्प्यूटर, 35 मोबाइल फोन, दर्जनों फर्जी सिम, डॉयलर मशीन, पेन ड्राइव, 2 लैपटॉप, फर्जी दस्तावेज की फाइलें मिली हैं। इस गिरोह में शामिल लड़कियां दिल्ली की रहने वाली हैं। विभांशु का साथी सुमित बिहार का रहने वाला है।