भगवान तक पहुंचेगी आपकी पुकार ; बस इस खास नियम से जलाए दीपक

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दीपक का तरह के होते हैं। जैसे चांदी का दीपक, मिट्टी का दीपक, तांबे का दीपक, पीतल का दीपक, आटे से बना हुआ दीपक। हालांकि इन सभी में सबसे अधिक इस्तेमाल मिट्टी से बना हुआ दीपक किया जाता है। शास्त्रों में दीपक जलाने को लेकर बहुत सी बातें बताई गई हैं। आइये जानते हैं दीपक जलाने के नियम।

आटे का दीपक।

पूजा करने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है आटे से बना दीपक। ज्योतिषी बताते हैं कि आटे के दीपक का प्रयोग किसी प्रकार की साधना या सिद्धि प्राप्ति के लिए की जाने वाली पूजा में किया जाता है।

घी का दीपक।

धन की कमी या आर्थिक तंगी को दूर करने के लिए व्यक्ति को हर दिन मंदिर में जाकर शुद्ध घी का दीपक जलाना चाहिए। इससे देवी-देवता प्रसन्न होते हैं और उस पर अपनी कृपा बरसाते हैं।

सरसों के तेल का दीपक।

शत्रुओं से बचने के लिए भैरव जी के मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए। इनके अलावा सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए भी सरसों के तेल का दीपक जलाने की सलाह दी जाती हैं।

तिल के तेल का दीपक।

शनि की साढ़ेसाती या शनि की ढैय्या के प्रकोप से बचने के लिए शनि मंदिर में तिल के तेल का दीपक जलाना चाहिए। मान्यता है कि इससे शनिदेव की कृपा मिलती है। साथ ही अन्य देवी-देवता भी प्रसन्न होते हैं।

चमेली के तेल वाला तिकोना दीपक।

संकट मोचक हनुमान जी की कृपा चाहिए तो चमेली के तेल से का तिकोना दीपक जलाना चाहिए। कहते बरसाते हैं।

12 मुखी दीपक।

भगवान भोलेनाथ की कृपा पाने के लिए तेल या फिर घी का 12 मुखी दीपक जलाना चाहिए। ऐसा करने से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं और अपनी कृपा बरसाते हैं।