छत्तीसगढ़ में दुनिया का यंगेस्ट साइंटिस्ट : रिसर्च बुक ‘वेलोसिटी मिस्ट्री’ का किया विमोचन;13 साल की उम्र में पीयूष के नाम कई उपलब्धियां

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रायपुर में बाल वैज्ञानिक पीयूष जायसवाल की रिसर्च बुक ‘वेलोसिटी मिस्ट्री’ का विमोचन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किया। गरियाबंद के रहने वाले पीयूष की किताब को सीएम आवास में लॉन्च किया गया। ‘वेलोसिटी मिस्ट्री’ करीब 3 महीने पहले मार्च में प्रकाशित हुई थी। गरियाबंद के रहने वाले 13 साल के बाल वैज्ञानिक पीयूष जायसवाल पर पूरे प्रदेश को गर्व है। उसकी किताब एस्ट्रोफिजिक्स विषय पर है।

28 अगस्त को दिल्ली में आयोजित सामाजिक राष्ट्रीय सम्म्मेलन में पुरस्कार लेने के बाद सोमवार को पीयूष जायसवाल अपने परिवार के साथ सीएम हाउस पहुंचा। पीयूष ने बताया कि उसकी बहुत इच्छा थी कि खुद मुख्यमंत्री अपने हाथों उसकी रिसर्च बुक का विमोचन करें। पीयूष जायसवाल ने मुख्यमंत्री को बताया कि उन्होंने खगोल विज्ञान में शोध कार्य के तहत इस किताब को लिखा है। जिसके लिए उन्हें सबसे कम उम्र के खगोल विज्ञान लेखक का ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड सर्टिफिकेट’ से नवाजा गया है। भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम पीयूष के प्रेरणास्रोत हैं।

बाल वैज्ञानिक पीयूष जायसवाल।
बाल वैज्ञानिक पीयूष जायसवाल।

सीएम भूपेश बघेल ने दिया आशीर्वाद

सीएम भूपेश बघेल ने प्रतिभावान छात्र की उपलब्धियों की सराहना कर उसे प्रदेश का गौरव बताया। उन्होंने पीयूष के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उसे आशीर्वाद भी दिया। इस अवसर पर कांग्रेस नेता विनोद तिवारी, पीयूष के दादा केआर जायसवाल, पिता पीएल जायसवाल, मां सुनीता जायसवाल, बहन साक्षी के अलावा इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड की अथॉरिटी की सदस्य सोनल वर्मा भी मौजूद थीं।

बाल वैज्ञानिक पीयूष जायसवाल अपनी मां औरबहन के साथ।
बाल वैज्ञानिक पीयूष जायसवाल अपनी मां औरबहन के साथ।

पीयूष के पहले अलबर्ट आइंस्टीन को मिला था खिताब

13 साल के पीयूष जायसवाल दुनिया के सबसे कम उम्र के साइंटिस्ट हैं. इससे पहले यह उपलब्धि महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन के नाम थी. अल्बर्ट आइंस्टीन को 17 साल की उम्र में सबसे कम उम्र के साइंटिस्ट होने का प्रमाणपत्र मिला था. दुनिया की सबसे बड़ी शोध संस्थाओं में से एक इंटरनेशनल जरनल्स ऑफ साइंटिफिक एंड इंजीनियरिंग (IJSER) ने इसी साल मार्च के महीने में पीयूष जायसवाल के नाम ये प्रमाणपत्र जारी किया था.

पीयूष की रिसर्च बुक और सर्टिफिकेट।
पीयूष की रिसर्च बुक और सर्टिफिकेट।

1 मार्च को मिली थी पीएचडी सर्टिफिकेट

पीयूष ने 20 पन्नों का शोध तैयार किया, जिसमें उन्होंने बताया कि ब्रह्मांड गुरुत्वाकर्षण बल पर टिका हुआ है और इसका बैलेंस बिगड़ने पर यह कैसे नष्ट हो सकता है. IJSER ने 1 मार्च को पीयूष को पीएचडी का सर्टिफिकेट भी जारी किया था.

पहले भी पीयूष को मिल चुके हैं कई सम्मान।
पहले भी पीयूष को मिल चुके हैं कई सम्मान।

12 साल की उम्र में लिखी थी ”फुलफिल ऑफ कॉसमॉस”

इससे पहले पीयूष जायसवाल ने 12 साल की उम्र में खगोलीय घटनाओं पर अंग्रेजी भाषा में 88 पन्नों की किताब ”फुलफिल ऑफ कॉसमॉस” लिखी थी। पीयूष भिलाई के शकुंतला विद्यालय के छात्र हैं। पीयूष जायवाल के माता-पिता दोनों ही मैनपुर में शिक्षक हैं।

13 साल की उम्र में पीयूष जायसवाल की बड़ी उपलब्धियां

  • यूएसए के मान्यता प्राप्त जर्नल ‘आईजेएसईआर’ से 13 साल की उम्र में पीएचडी और दुनिया के यंगेस्ट वैज्ञानिक की उपाधि प्राप्त की है।
  • गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स से “एस्ट्रोफिजिक्स पर सबसे कम उम्र के पुस्तक लेखक” का खिताब मिला है।
  • 12 साल की उम्र में खगोल विज्ञान के बारे में एक किताब ‘फुलफिल ऑफ कॉसमॉस’ लिख चुके हैं।
  • खगोल भौतिकी के बारे में वेग रहस्य (velocity mystery) पर अपना शोध करके सबसे कम उम्र के बाल वैज्ञानिक बने।
  • NASO ओलंपियाड से स्वर्ण पदक और सर्टिफिकेट मिला। विदेश यात्रा के लिए भी चयनित हुए थे।
  • सार्वजनिक भाषण में और कवि सम्मेलन में स्वर्ण पदक विजेता हैं।
  • सैनिक स्कूल पुंगलवा, नागालैंड के लिए चयनित हो चुके हैं।
  • भवगत गीता पाठ, गीता प्रश्रोत्तरी में छत्तीसगढ़ संस्कृत शिक्षा संस्थान से राज्य स्तर पर प्रथम स्थान के साथ गोल्ड मेडल व सर्टिफिकेट मिल चुका है।
  • राष्ट्रपति बाल वीरता पुरस्कार 2023 के लिए नामित हुए हैं।
  • छत्तीसगढ़ स्वाभिमान संस्थान की ओर से छत्तीसगढ़ के आदर्श गौरव समाज भूषण सम्मान और विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए सम्मान हासिल।
  • भिलाई की सबसे बड़ी शिक्षण संस्था शकुंतला विद्यालय (सीबीएसई) में पीयूष को कक्षा नवमी से बारहवीं तक की संपूर्ण आवासीय सुविधा के साथ निःशुल्क शिक्षा मिलेगी।