चूहों ने तबाह किया ट्रैन के पार्सल, व्यापारियों ने रेलवे से चॉकलेट मेवे और कपड़ों के पार्सल भेजना किए बंद…

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रायपुर के कारोबारियों में रेलवे के चूहों का ऐसा डर बैठ गया है कि अब रेलवे के पार्सल में वे चाॅकलेट, ड्रायफ्रूट्स और कपड़े नहीं भेज रहे हैं। वे सड़क मार्ग से इन चीजों को भेज रहे हैं। चूहे व्यापारियों का लाखों का माल खराब कर रहे हैं, या चट कर जा रहे हैं। इससे रेलवे के पार्सल बिजनेस में बड़ा असर पड़ा है। रेलवे के अफसर भी इस समस्या से जूझ रहे हैं। आलम ये है कि हर महीने रेलवे ऑपरेशन चूहा चला रहा है, लेकिन चूहे कंट्रोल नहीं हो रहे।

रायपुर रेलवे स्टेशन से एक दिन में करीब 18 ट्रेनों के जरिए देशभर के अलग-अलग कोने में पार्सल के माध्यम से कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक, इलेक्ट्रिक, ऑटो पा‌र्ट्स, चाकलेट, ड्रायफ्रूट्स, नमकीन, चिप्स आदि खाने-पीने के सामान पार्सल होते हैं। अभी रक्षाबंधन का त्यौहार है, तो चाकलेट, कपड़ा और ड्रायफ्रूट्स इत्यादि सामग्री की सप्लाई ज्यादा हो रही है। लेकिन इस बार कारोबारी रेलवे का इस्तेमाल नहीं कर रहे, बल्कि ट्रांसपोर्ट से सामान भेज रहे हैं।

खाने के सामान का हर पार्सल डैमेज
रेलवे पार्सल ऑफिस के मुताबिक चॉकलेट के व्यापारी यहां से टाटा, राऊरकेला, चक्रधरपुर और विशाखापट्टनम में रोज करीब 800 से अधिक कार्टून भेजते थे। लेकिन अब इनकी संख्या 200 के आसपास ही रह गई है। एक तरफ पार्सल ऑफिस में सामान रखने की जगह नहीं है, तो दूसरी तरफ जो सामान रखा हुआ है, उन्हें चूहे कुतर रहे हैं।

इसलिए पार्सल में चूहों की भरमार | चूहों के आने की मुख्य वजह यह है कि यहां पर इन्हें कुतरने व खाने-पीने की चीजें आसानी से मिल जाती है। रायपुर स्टेशन से रोज 112 ट्रेनें गुजरती हैं। हजारों लोगों की आवाजाही है। लोग खाने-पीने के सामान पटरियों व स्टेशन में फेंकते हैं। इससे चूहे बढ़ते हैं। इसके साथ ही पार्सल कार्यालय में उनको आसानी से खाने-पीने की सामग्री मिल जाती है।

हर माह 50 चूहे पकड़े, फिर बढ़ जाते हैं | रेलवे हर माह तीन दिन तक चूहों को पकड़ने के लिए स्पेशल अभियान चला रहा है। जिसमें हर बार करीब 50 चूहे पकड़ में आ जाते हैं, उसके बाद कुछ दिन चूहे कम दिखते हैं, फिर बढ़ने लगते है। अफसरों के अनुसार चूहों का आतंक सबसे ज्यादा ट्रैक, पार्सल और गार्डन में है।

यह सही है कि कारोबारियों ने यहां कुछ पार्सल तकरीबन बंद कर दिए हैं। हो सकता है कि उन्हें बेहतर विकल्प मिल गया हो। जहां तक चूहों का सवाल है, हम हर महीने विशेष अभियान चला रहे हैं। -विपिन वैष्णव, सीनियर डीसीएम रायपुर

रेलवे से ही पार्सल मंगवाते थे। चूहे सामान खराब कर देते हैं, नुकसान होने लगा था, इसलिए सड़क से माल भेज रहे हैं। -अशोक छेतिजा, अध्यक्ष कंफेक्शनरी एसो.