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छत्तीसगढ़ में मेडिकल शिक्षा का बड़ा विस्तार, 9 वर्षों में तीन गुना से अधिक बढ़ीं MBBS सीटें

छत्तीसगढ़ में मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति देखी गई है। बीते 9 वर्षों में राज्य में एमबीबीएस की सीटों की संख्या 700 से बढ़कर 2130 हो गई है। यह तीन गुना से अधिक की वृद्धि है, जिसका सीधा लाभ स्थानीय छात्रों को मिल रहा है। सीटों में वृद्धि के कारण कट-ऑफ कम हुआ है और छात्रों को बाहर के राज्यों में जाकर पढ़ाई करने की आवश्यकता भी कम हो गई है। आने वाले दो वर्षों में एमबीबीएस की 500 और सीटें बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

नीट यूजी परीक्षा 4 मई को आयोजित की जा चुकी है। 2016 में प्रदेश में सिर्फ 5 सरकारी और 1 निजी मेडिकल कॉलेज कार्यरत थे। रायपुर के नेहरू मेडिकल कॉलेज के अलावा बिलासपुर, रायगढ़, राजनांदगांव और जगदलपुर में सरकारी कॉलेज थे। वहीं दुर्ग में स्थित निजी मेडिकल कॉलेज अब अधिग्रहण के बाद सरकारी बन चुका है।

फिलहाल राज्य में कुल 15 मेडिकल कॉलेज हैं, जिनमें से 10 सरकारी संस्थान हैं। सीटों की बढ़ोत्तरी से उन छात्रों को खास फायदा हुआ है जो नीट में अच्छा प्रदर्शन करते हैं और डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं। प्रदेश में एमबीबीएस की फीस भी अन्य राज्यों की तुलना में कम मानी जा रही है, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ भी कम हुआ है।

एनएमसी निरीक्षण से सीटों में और वृद्धि की उम्मीद

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए निरीक्षण शुरू कर दिया है। प्रदेश के चार निजी मेडिकल कॉलेजों ने 150 से 250 सीटों तक की वृद्धि का प्रस्ताव भेजा है। हालांकि, सरकारी कॉलेजों की ओर से अब तक कोई नया प्रस्ताव सामने नहीं आया है। नेहरू मेडिकल कॉलेज रायपुर में पहले से ही 230 सीटें मौजूद हैं, और वहां पर्याप्त फैकल्टी भी है, इसके बावजूद प्रबंधन ने सीट बढ़ाने के लिए आवेदन नहीं किया।

वहीं कुछ निजी कॉलेजों ने फैकल्टी की कमी के बावजूद, ऑनलाइन निरीक्षण के आधार पर सीट बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

गणवत्ता पूर्ण शिक्षा पर ध्यान

राज्य सरकार और शिक्षा विभाग अब सिर्फ सीट बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि क्वालिटी एजुकेशन पर भी जोर दे रहे हैं। प्रयास किया जा रहा है कि छात्र न केवल थ्योरी में, बल्कि प्रैक्टिकल ज्ञान में भी दक्ष बनें।

ईडब्ल्यूएस कोटे में वृद्धि

2016 में आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग (EWS) के लिए कोई अलग सीटें नहीं थीं। बाद में केंद्र सरकार ने इस वर्ग के लिए 10% आरक्षण लागू किया। इसके तहत कॉलेजों में सीटों के अनुसार अतिरिक्त सीटें दी गईं। हालांकि दुर्ग मेडिकल कॉलेज को तय सीमा से अधिक 50 सीटें दे दी गईं, जिससे यह कॉलेज सीटों के मामले में प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा कॉलेज बन गया, भले ही वहां सुविधाएं अपेक्षित स्तर की नहीं हैं।

इस प्रकार छत्तीसगढ़ में मेडिकल एजुकेशन ने बीते कुछ वर्षों में न सिर्फ विस्तार किया है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा की दिशा में भी मजबूत कदम उठाए हैं।

बाजार में आम की बहार, जल्द घटेंगे दाम

फल बाजारों में इन दिनों आम सहित मौसमी फलों की आवक जोर पकड़ रही है। फलों के राजा आम की विभिन्न किस्मों—दशहरी, चौसा, लंगड़ा, तोतापरी और नीलम—की बाजार में भारी मात्रा में आमद देखी जा रही है। इसके अलावा तरबूज और खरबूज की भी अच्छी खासी आवक हो रही है। तरबूज के दाम कम होने की वजह से इसकी बिक्री में तेजी देखी जा रही है।

थोक फल विक्रेताओं के अनुसार, आम इस समय वैरायटी के अनुसार थोक बाजार में 50 से 60 रुपये प्रति किलो के भाव से बिक रहा है, जबकि फुटकर बाजार में इसकी कीमत 80 से 120 रुपये प्रति किलो तक पहुंच रही है। हालांकि, आम की आवक निर्धारित समय पर हो रही है, लेकिन उत्पादन में कमी के कारण इस बार कीमतें अपेक्षाकृत अधिक बनी हुई हैं। पिछली बार की तुलना में इस सीजन में आम की आवक कम है, जिसका कारण तेज हवाओं और समय-समय पर हुई बारिश को बताया जा रहा है।

व्यापारियों का मानना है कि जैसे-जैसे गर्मी बढ़ेगी, आम की मिठास और मात्रा दोनों में इजाफा होगा। इसके साथ ही कीमतों में भी गिरावट आने की संभावना है। अप्रैल से अगस्त तक चलने वाले आम के सीजन में शुरुआती आम महंगे और कम स्वादिष्ट होते हैं, लेकिन धीरे-धीरे गुणवत्ता और मिठास में सुधार होता है।

बाजार में पहुंचने वाले आम प्रमुख रूप से ओडिशा, तेलंगाना, मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक और उत्तरप्रदेश के लखनऊ, प्रतापगढ़, सीतापुर, मुरादाबाद, मेरठ और प्रयागराज जैसे क्षेत्रों से आ रहे हैं। आने वाले दिनों में जब आम की आवक और बढ़ेगी, तब कीमतों में और गिरावट देखी जा सकती है।

छत्तीसगढ़ के किसानों को धान की घटती कीमतों से भारी नुकसान, कर्ज में डूबने की नौबत

छत्तीसगढ़ की मंडियों में रबी सीजन के चलते इन दिनों धान की भरपूर आवक हो रही है, लेकिन कीमतें इतनी कम मिल रही हैं कि किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। राजिम कृषि उपज मंडी में किसान अपना धान केवल 1600 से 1900 रुपए प्रति क्विंटल में बेचने को मजबूर हैं, जबकि खरीफ सीजन में यही धान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 3100 रुपए प्रति क्विंटल तक बिका था। कीमतों में आए इस भारी अंतर ने किसानों की आर्थिक स्थिति को हिला कर रख दिया है।

उत्पादन लागत भी नहीं निकल रही

किसान दीपक कुमार ने बताया कि उन्होंने फसल की कटाई के लिए हार्वेस्टर, जुताई के लिए किराए का ट्रैक्टर, महंगे बीज, खाद, कीटनाशक और सिंचाई पर बड़ी राशि खर्च की थी। इसके अलावा तना छेदक और भूरा माहू जैसे कीटों ने भी फसल को नुकसान पहुंचाया। तमाम मेहनत और लागत के बावजूद उन्हें केवल 1650 रुपए प्रति क्विंटल की दर मिल रही है, जिससे लागत भी नहीं निकल पा रही।

मजदूरी और मौसम की मार

किसान दीनदयाल, संतोष, विष्णु, मदन और गोपाल जैसे कई किसान बताते हैं कि दिनभर वे धान सुखाने और बोली के लिए मंडी में इंतज़ार करने में बिता देते हैं। अगर उनकी मेहनत का मूल्य मजदूरी के हिसाब से जोड़ा जाए तो वे हजारों रुपए की अतिरिक्त मेहनत कर रहे हैं।

बदलते मौसम और सुरक्षा की कमी

बदलते मौसम और बारिश की आशंका ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। किसान अपनी उपज को तिरपाल और प्लास्टिक शीट्स से ढक रहे हैं, जिससे उनकी जेब पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है। वहीं मंडियों में टीन शेड की कमी और खुले चबूतरों पर उपज सुखाना मजबूरी बना हुआ है। सुरक्षा की व्यवस्था भी नदारद है, जिससे छुट्टा जानवर धान को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

मंडी में मजबूरी में बेच रहे किसान

मंगलवार को मंडी में अधिकतम बोली 1900 रुपए प्रति क्विंटल तक ही पहुंच सकी। किसान बताते हैं कि उनके पास धान को रोकने का विकल्प नहीं है, क्योंकि उन्हें खेत के अन्य कामों और उधार चुकाने की जल्दी है। मजबूरीवश वे कम दामों पर ही धान बेचने को विवश हैं।

रायपुर में सेक्स रैकेट का भंडाफोड़: 11 युवतियां और 4 पुरुष गिरफ्तार, दो होटल बने केंद्र

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में देह व्यापार से जुड़े एक संगठित रैकेट का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। रविवार को पुलिस ने दो अलग-अलग होटलों—नहरपारा स्थित आदित्य गेस्ट हाउस और फाफाडीह के गगन ग्रांड होटल—में एक साथ छापेमारी कर इस रैकेट का खुलासा किया। इस दौरान पुलिस ने 11 युवतियों और 4 पुरुषों को हिरासत में लिया।

गिरफ्तार की गई युवतियां पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ की रहने वाली हैं। पुलिस के अनुसार, इस अवैध धंधे में स्थानीय लोग भी सक्रिय रूप से शामिल थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए होटल की महिला रिसेप्शनिस्ट और मालिकों को भी आरोपी बनाया गया है। इनके खिलाफ पीटा एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है।

पुलिस इस नेटवर्क को मानव तस्करी और संगठित देह व्यापार का हिस्सा मानते हुए जांच को आगे बढ़ा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह में कई अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं, जिनकी तलाश जारी है।

इस कार्रवाई को रायपुर पुलिस की एक बड़ी सफलता माना जा रहा है, जिससे शहर में फैलती अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने की दिशा में अहम प्रगति हुई है।

छत्तीसगढ़ की बेटियां अनिशा और गीता दिखाएंगी अर्जेंटीना में अपना दमखम, जूनियर इंडिया टीम में चयन

छत्तीसगढ़ की दो उभरती हुई हॉकी खिलाड़ी अनिशा साहू और गीता यादव को जूनियर भारतीय महिला हॉकी टीम में शामिल किया गया है। ये दोनों खिलाड़ी अर्जेंटीना के रोसारियो में 25 मई से 2 जून 2025 तक आयोजित होने वाले फोर नेशंस हॉकी टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। इस प्रतियोगिता में भारत के अलावा अर्जेंटीना, उरुग्वे और चिली की टीमें हिस्सा लेंगी।

वर्ल्ड कप की तैयारी का अहम पड़ाव

यह टूर्नामेंट आगामी जूनियर महिला हॉकी वर्ल्ड कप 2025 की तैयारियों के तहत आयोजित किया जा रहा है। इसमें 24 सदस्यीय टीम का गठन किया गया है, जिसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली खिलाड़ियों का चयन दिसंबर में होने वाले एफआईएच जूनियर वर्ल्ड कप के लिए किया जाएगा।

अनुभवी खिलाड़ी हैं अनिशा और गीता

अनिशा साहू पिछले चार वर्षों से जूनियर टीम का हिस्सा रही हैं, जबकि गीता यादव ने पिछले दो सालों में अपने प्रदर्शन के दम पर टीम में मजबूत जगह बनाई है। इससे पहले अनिशा बेल्जियम, नीदरलैंड और जर्मनी जैसे देशों का दौरा कर चुकी हैं। यह उनका भारतीय टीम के साथ तीसरा अंतरराष्ट्रीय दौरा होगा। वहीं गीता भी नीदरलैंड और बेल्जियम में खेल चुकी हैं।

छत्तीसगढ़ की गौरवशाली भागीदारी

छत्तीसगढ़ हॉकी संघ के अध्यक्ष फिरोज अंसारी ने बताया कि टूर्नामेंट में भारत प्रत्येक टीम के खिलाफ दो-दो मैच खेलेगा जिससे रणनीतियों की जांच और टीम संयोजन का मूल्यांकन किया जा सके। छत्तीसगढ़ हॉकी के महासचिव मनीष श्रीवास्तव ने जानकारी दी कि गीता यादव कबीरधाम जिले के ग्राम बोड़ला की निवासी हैं और उन्होंने खेलो इंडिया सेंटर बहतराई, बिलासपुर में प्रशिक्षण प्राप्त किया है। दोनों खिलाड़ी राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में राज्य का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।

टूर्नामेंट में भारत का पहला मुकाबला चिली के खिलाफ खेला जाएगा।

यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ के खेल जगत के लिए गौरव का विषय है और राज्य की बेटियों की मेहनत तथा प्रतिभा का प्रमाण भी।

गृहमंत्री विजय शर्मा का राहुल गांधी पर हमला: नक्सलवाद पर गंभीर नहीं, पीठ पीछे रच रहे साजिश

छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। बस्तर दौरे के दौरान रविवार सुबह रायपुर रवाना होने से पहले उन्होंने जगदलपुर में मीडिया से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी नक्सलवाद जैसे गंभीर मसले को लेकर संजीदा नहीं हैं और पर्दे के पीछे आपत्तिजनक गतिविधियों में संलिप्त हैं।

विजय शर्मा ने कहा कि उनके पास इसके प्रमाण हैं कि राहुल गांधी नक्सलवाद पर दोहरी नीति अपना रहे हैं। उन्होंने कहा, “यह देश और समाज की सुरक्षा से जुड़ा विषय है, लेकिन राहुल गांधी इस पर ईमानदारी से काम नहीं कर रहे।” उन्होंने तेलंगाना सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि कर्रेगुट्टा ऑपरेशन में कांग्रेस शासित राज्य से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।

उन्होंने दिल्ली में राहुल गांधी की ‘शांति समन्वय समिति’ से मुलाकात पर भी सवाल उठाए। यह समिति नक्सलियों और सरकार के बीच संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से बनाई गई है, पर छत्तीसगढ़ सरकार ने इससे जुड़ने से साफ इनकार किया है।

विजय शर्मा ने कहा कि सरकार बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन केवल उन्हीं से बात होगी जो हिंसा छोड़ चुके हैं। उन्होंने कहा, “केवल पत्र लिखने से शांति वार्ता नहीं होगी, नक्सलियों को हथियार छोड़कर सामने आना होगा।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नक्सलियों पर दर्ज मामलों को स्वत: समाप्त नहीं किया जाएगा। समर्पण के बाद ही पुनर्वास नीति के तहत मामलों की समीक्षा की जाएगी।

अंत में उन्होंने नक्सलियों की दोहरी मानसिकता पर भी सवाल उठाए और कहा, “नक्सलियों के बच्चे विदेशों में पढ़ रहे हैं, लेकिन बस्तर में स्कूलों को बम से उड़ाकर आदिवासी बच्चों को शिक्षा से वंचित कर रहे हैं। अब तक 200 से ज्यादा स्कूलों को नक्सली नष्ट कर चुके हैं।”

बस्तर के महुए की चाय की खुशबू पहुंची लंदन तक, पांच फ्लेवर में मिल रही है सेहत की सौगात

महुए का नाम सुनते ही अब केवल शराब का ख्याल नहीं आता। बस्तर में महुआ अब स्वास्थ्यवर्धक उत्पादों के रूप में भी उभर रहा है। लड्डू और कैण्डी के बाद अब इससे चाय और काढ़ा तैयार किया जा रहा है, जो न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी लोकप्रिय हो रहा है। बस्तर फूड्स नामक संस्था ने महुए की चाय के पांच अलग-अलग फ्लेवर तैयार किए हैं, जिन्हें लंदन सहित कई देशों में खूब पसंद किया जा रहा है।

संस्था का दावा है कि इन फ्लेवर वाली चाय के सेवन से खून की कमी, थाइरॉइड समस्याएं और शरीर के दर्द जैसी समस्याएं दूर होती हैं। लंदन में इस चाय की यूनिट शुरू हो चुकी है, जिसके लिए बस्तर से 50 टन महुआ भेजा गया है। वहीं, भारत में भी 20 टन महुए से चाय का उत्पादन किया जा रहा है। इस चाय की मांग भारत के प्रमुख शहरों के साथ-साथ अमेरिका, यूके और यूएई जैसे देशों में भी बढ़ रही है।

पंच तत्वों से प्रेरित फ्लेवर

मानव शरीर के पांच तत्वों — पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश — के आधार पर महुए की चाय के पांच फ्लेवर विकसित किए गए हैं। प्रत्येक फ्लेवर के अपने स्वास्थ्य लाभ हैं और इन्हें आयुर्वेद के सिद्धांतों पर तैयार किया गया है। चाय बनाने की एक यूनिट अब हैदराबाद में भी शुरू की गई है।

महुआ की चाय: एक प्राकृतिक डिटॉक्स

संस्था की संस्थापक रजिया शेख के अनुसार, सूखे महुए के फूलों को अदरक, तुलसी, और शहद या गुड़ के साथ उबालकर तैयार की गई यह चाय न केवल ऊर्जा देती है, बल्कि शरीर को डिटॉक्स भी करती है। यह पाचन सुधारने, थकान दूर करने और शरीर को मजबूत बनाने में मदद करती है।

ठंडे देशों में भी बनी पसंदीदा

महुए की यह चाय खासतौर पर ठंडे इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए फायदेमंद मानी जा रही है, क्योंकि यह शरीर को गर्म रखती है और इम्युनिटी को मजबूत करती है। इसकी आयुर्वेदिक खूबियों के कारण इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सराहा जा रहा है।

रोजगार का साधन बना महुआ

वन विभाग द्वारा जंगलों में नेट लगाकर उच्च गुणवत्ता वाला महुआ एकत्रित किया जा रहा है। इसके साथ ही स्थानीय युवाओं को इसके प्रसंस्करण और उत्पाद निर्माण का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, जिससे उन्हें रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। देश-विदेश में इस चाय की बढ़ती मांग से बस्तर के महुए को नई पहचान मिल रही है।

छत्तीसगढ़ की भुमिका देवांगन ने 95.8% अंक प्राप्त कर टॉप 10 में बनाई जगह, चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने का सपना

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छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) की 12वीं बोर्ड परीक्षा में रायपुर के बीरगांव क्षेत्र की छात्रा भुमिका देवांगन ने 95.8 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रदेश की टॉप 10 मेरिट सूची में स्थान बनाया है। भुमिका ने अपनी स्कूली शिक्षा स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, फाफाडीह से पूरी की है। इसके साथ ही उन्होंने कॉमर्स विषय की तैयारी बीरगांव स्थित कृष्णा कोचिंग क्लासेस से की, जहां उन्हें बेहतर मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।

भुमिका ने पिता को पहले ही खो दिया था और उनकी परवरिश अकेले उनकी मां ने की है। अपनी सफलता पर भावुक भुमिका ने कहा कि उनकी मां ही उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा रही हैं। उन्होंने हर परिस्थिति में उनका साथ दिया और उन्हें आगे बढ़ने का हौसला दिया। भुमिका का सपना है कि वह भविष्य में चार्टर्ड अकाउंटेंट बनें और इसके लिए उन्होंने अभी से तैयारी शुरू कर दी है।

पढ़ाई की रणनीति के बारे में बताते हुए भुमिका ने कहा कि मोबाइल और सोशल मीडिया सबसे बड़ा व्याकुलता का कारण बनते हैं, इसलिए उन्होंने इससे दूरी बनाकर पढ़ाई पर फोकस बनाए रखा। उन्होंने यह भी कहा कि निरंतर पढ़ाई और नियमित अभ्यास सफलता की कुंजी है।

भुमिका की मां ने बेटी की सफलता पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि भुमिका शुरू से ही पढ़ाई में रुचि रखती थी। उसकी मेहनत ने आज रंग लाया है और वह भविष्य में भी उसे हर संभव सहयोग देती रहेंगी।

भुमिका की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए बल्कि पूरे बीरगांव और उनके स्कूल के लिए गर्व का विषय बन गई है।

उरकुरा में निगम की कार्यवाही पर कांग्रेस का विरोध, पार्षद पर गंभीर आरोप

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उरकुरा क्षेत्र के एक गरीब परिवार द्वारा सोमवार सुबह नगर निगम की कार्यवाही की जानकारी मिलने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई। परिवार ने बताया कि निगम प्रशासन उनके मकान को तोड़ने पहुंचा, जबकि परिवार का मुखिया पिछले एक साल से बीमार है और उठने-बैठने में भी असमर्थ है।

सूचना मिलते ही कांग्रेस पार्टी के स्थानीय नेता और कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। कांग्रेस पार्षद रितेश सिंह, युवा कांग्रेस बिरगांव ब्लॉक अध्यक्ष बैशाखू सागर, कांग्रेस सोशल मीडिया सचिव ज्वाला गोस्वामी, एनएसयूआई सचिव जीत निर्मलकर, कोमल साहू, सुनील साहनी, दीपक साहनी, सोनू और छोटा सहित कई कार्यकर्ताओं ने निगम अधिकारियों से चर्चा की और कार्यवाही को तत्काल रोकने की मांग की। अधिकारियों ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कार्यवाही को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया।

मौके पर उपस्थित कुछ महिलाओं और स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि वर्तमान वार्ड पार्षद शरद साहू ने आवास दिलाने और जमीन पर कब्जा कराने के नाम पर 25 से अधिक गरीब परिवारों से लाखों रुपये की वसूली की है। इस जानकारी के सामने आते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कमर कस ली और खमतराई थाने पहुंचकर पार्षद शरद साहू के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर सख्त कार्यवाही की मांग की।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि गरीबों के साथ इस प्रकार की ठगी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। इस मुद्दे को लेकर क्षेत्र में भारी आक्रोश है और जल्द ही कांग्रेस इस संबंध में आंदोलन की राह भी अपना सकती है।