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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में आज हुई राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड की बैठक में बड़ा फैसला हुआ है। सरकार ने वर्ष 2001 से 2018 तक की अवधि में विभिन्न कंपनियों के साथ हुए निवेश के 158 करारों (MOU) को रद्द करने का फैसला किया है। बोर्ड की बैठक में बताया गया, इन करारों के मुताबिक अभी तक कोई काम नहीं हुआ है। ये सभी करार अजीत जाेगी और डॉ. रमन सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में हुए थे।

मुख्यमंत्री निवास में अबसे थोड़ी देर पहले खत्म हुई राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड की बैठक में वर्ष 2001 से 2018 और वर्ष 2012 में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट के दौरान राज्य में उद्योगों की स्थापना के लिए किए गए करारों के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई। बताया गया, वर्ष 2001 से 2018 के बीच 3 लाख 3 हजार 115 करोड़ 70 लाख रुपए के पूंजी निवेश के 211 करार हुए थे।

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इनमें वास्तविक पूंजी निवेश 78 हजार 776 करोड़ 36 लाख रुपए का हुआ है। 67 एमओयू में उत्पादन प्रारंभ हो चुका है, 61 एमओयू में क्रियान्वयन प्रारंभ हो गया है। इस दौरान हुए 55 एमओयू में कार्य शुरू भी नहीं हो पाया है। इसी तरह 2012 में ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट में 93 हजार 830 करोड़ रुपए 69 लाख रुपए पूंजी निवेश के 275 करार हुए थे। इनमें से वास्तविक पूंजी निवेश 2 हजार 3 करोड़ 59 लाख रुपए का हुआ है।

6 परियोजनाओं में उत्पादन प्रारंभ हो चुका है। 25 परियोजनाओं में स्थल चयन कर क्रियान्वयन प्रारंभ हो गया है। शेष 103 एमओयू में कोई कार्य प्रारंभ नही हुआ है। बोर्ड ने अभी तक सक्रिय नहीं हो पाए ऐसे सभी 158 एमओयू को रद्द करने का फैसला कर लिया। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद निवेश प्रोत्साहन बोर्ड की यह पहली बैठक थी। इससे पहले बोर्ड की आखिरी बैठक 2016 में हुई थी।

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2019 के बाद 115 एमओयू में से 92 में काम शुरू

निवेश प्रोत्साहन बोर्ड की बैठक में नए करारों की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। बताया गया, वर्ष 2019 से अब तक 115 एमओयू प्रभावशील हैं। इनमें प्रस्तावित पूंजी निवेश 46 हजार 937 करोड़ रुपए है। इनके आधार पर 92 परियोजनाओं में क्रियान्वयन प्रारंभ हो चुका है। वहीं एक इकाई में उत्पादन भी शुरू हो गया है। 23 नवीन एमओयू में कार्य प्रारंभ होना है।

चौबे बोले, रमन सिंह के इन्वेस्टर्स मीट से ढाई आने का भी निवेश नहीं आया

बैठक के बाद कृषि एवं जल संसाधन मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा, आज की बैठक में पुराने निर्णयों के पन्ने पलटकर देखा गया। तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह निवेश आकर्षित करने टेक्सस (अमेरिका) गए थे। जानकारी लिया गया तो पता चला कि वहां हुए एमओयू का एक नया पैसा छत्तीसगढ़ में लग नहीं पाया, न ही कोई निवेशक आया। उसके बाद रमन सिंह ने यहां इन्वेस्टर्स मीट कराया था। कहा गया था, ढाई लाख करोड़ रुपए का एमओयू किया गया है। आज विभाग ने बताया कि ढाई नए पैसे का भी निवेश नहीं आया है।

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उद्योगों के लिए दो अलग-अलग समितियां बनेंगी

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश के सभी उद्योगों की समस्याओं को दूर करने के लिए दो अलग-अलग समितियों के गठन का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा, नीतिगत मामलों के संबंध में उद्योग मंत्री की अध्यक्षता में समिति गठित हो और क्रियान्वयन संबंधी मामलों के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति का गठन किया जाए।

उन्होंने कहा कि इन समितियों के माध्यम से कृषि आधारित उद्योगों तथा बस्तर अंचल में लौह खनिज आधारित उद्योगों की स्थापना के कार्य में भी तेजी लाने के प्रयास किए जाएं। मुख्यमंत्री ने मक्का और गन्ना से एथेनाॅल तैयार करने के प्लांट की स्थापना के लिए पूंजी निवेश के प्रस्तावों को परीक्षण के बाद जल्द से जल्द स्वीकृति प्रदान करने को भी कहा।