Home Chhattisgarh news Bastar news सलवा जुडूम पर रोक ने बढ़ाई नक्सली ताकत, बस्तर पीड़ितों ने सांसदों से कहा- सुदर्शन रेड्डी को समर्थन न दें

सलवा जुडूम पर रोक ने बढ़ाई नक्सली ताकत, बस्तर पीड़ितों ने सांसदों से कहा- सुदर्शन रेड्डी को समर्थन न दें

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सलवा जुडूम पर रोक ने बढ़ाई नक्सली ताकत, बस्तर पीड़ितों ने सांसदों से कहा- सुदर्शन रेड्डी को समर्थन न दें

रायपुर/बस्तर। INDIA गठबंधन के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी की उम्मीदवारी को लेकर बस्तर में विरोध तेज हो गया है। नक्सली हिंसा झेल चुके आदिवासी समुदाय और पीड़ित परिवारों ने सांसदों को पत्र लिखकर अपील की है कि वे रेड्डी को समर्थन न दें। उनका आरोप है कि रेड्डी के फैसले ने माओवादियों को बल दिया और सलवा जुडूम आंदोलन को बंद कर बस्तर को और असुरक्षित बना दिया।

सलवा जुडूम रोकने का दर्द, पीड़ितों की आपबीती
बस्तर शांति समिति के बैनर तले इकट्ठा हुए पीड़ितों ने कहा कि सलवा जुडूम की वजह से नक्सली कमजोर पड़ चुके थे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इसे बंद कर दिया गया। समिति का कहना है कि यह फैसला बिना स्थानीय राय के लिया गया और इससे बस्तर की स्थिति बिगड़ गई।

  • सियाराम रामटेके, जो हमले में दिव्यांग हो गए, बोले – “अगर सलवा जुडूम चलता रहता तो मैं अपंग न होता। रेड्डी की उम्मीदवारी हमारे घाव ताज़ा कर रही है।”

  • केदारनाथ कश्यप ने कहा – “मेरे भाई की नक्सलियों ने हत्या की। अगर आंदोलन बंद न होता तो 2014 तक बस्तर नक्सलमुक्त हो जाता।”

  • शहीद मोहन उइके की पत्नी बोलीं – “पति नक्सली हमले में शहीद हो गए, उस समय मेरी बच्ची सिर्फ तीन महीने की थी। हमारी कुर्बानियों का कोई मूल्य नहीं?”

  • महादेव दूधु, जो चितंगावरम बस हमले में एक पैर गंवा बैठे, ने कहा – “आज भी दर्द भूल नहीं पाता। सलवा जुडूम बंद होना हमारी सबसे बड़ी त्रासदी थी।”

समिति सदस्यों ने साफ कहा कि सांसद बस्तर के घावों को समझें और ऐसे व्यक्ति का समर्थन न करें, जिसने आदिवासियों की सुरक्षा छीन ली।

क्या है सलवा जुडूम?
2005 में बस्तर में शुरू हुआ यह अभियान गोंडी भाषा में “शांति यात्रा” कहलाता है। कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा ने इसकी नींव रखी और बाद में भाजपा सरकार ने भी इसे समर्थन दिया। इसके तहत ग्रामीणों को स्पेशल पुलिस ऑफिसर (SPO) बनाकर हथियार दिए गए और नक्सलियों से लड़ने मैदान में उतारा गया।

644 गांव खाली, मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप
इस दौरान हजारों आदिवासी अपने गांव छोड़कर कैंपों में रहने को मजबूर हुए। मानवाधिकार संगठनों ने आरोप लगाया कि निर्दोषों की हत्याएं, महिलाओं पर हिंसा और जबरन विस्थापन इस अभियान की काली सच्चाई थी।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश (2011)
दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर नलिनी सुंदर, इतिहासकार रामचंद्र गुहा और अन्य कार्यकर्ताओं की याचिका पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आदिवासियों को हथियार देना असंवैधानिक है। कोर्ट ने SPO की नियुक्तियां रद्द कर दीं और सलवा जुडूम को गैरकानूनी घोषित किया।

आज का विवाद
इसी फैसले से जुड़े बी. सुदर्शन रेड्डी अब विपक्ष के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार हैं। लेकिन बस्तर के हजारों परिवार उनकी उम्मीदवारी का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस फैसले से नक्सलियों का आतंक बढ़ा और बस्तरवासी आज भी उसकी कीमत चुका रहे हैं।