Home Chhattisgarh news Bhilai news छत्तीसगढ़ की धरोहर मटपरई कला को मिला नया जीवन, दुर्ग के युवा शिल्पकार अभिषेक की अनोखी पहल

छत्तीसगढ़ की धरोहर मटपरई कला को मिला नया जीवन, दुर्ग के युवा शिल्पकार अभिषेक की अनोखी पहल

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छत्तीसगढ़ की धरोहर मटपरई कला को मिला नया जीवन, दुर्ग के युवा शिल्पकार अभिषेक की अनोखी पहल

छत्तीसगढ़ की पारंपरिक मटपरई कला, जो मिट्टी और कागज की लुगदी से बनाई जाती है और धीरे-धीरे विलुप्त हो रही थी, अब एक बार फिर पहचान बना रही है। दुर्ग जिले के उतई नगर निवासी युवा शिल्पकार अभिषेक सपन ने इस लोककला को नई दिशा दी है।

तीजा तिहार पर परंपराओं को सजीव रूप
तीजा तिहार, जिसे छत्तीसगढ़ की महिलाएं बड़े उत्साह से मनाती हैं, इस बार अभिषेक की कलाकृतियों में झलकता नजर आया। उन्होंने मिट्टी और कागज से ऐसी मूर्तियां बनाई हैं, जिनमें भाई-बहन के रिश्ते, शिव पूजन और पारंपरिक रस्मों को दर्शाया गया है।

क्या है मटपरई कला?
‘मट’ यानी मिट्टी और ‘परई’ यानी कागज की लुगदी—इन दोनों से मिलकर बनने वाली यह शिल्पकला कभी घर-घर की पहचान थी। इससे खिलौने, गुल्लक, टोकरी और अन्य सजावटी सामान तैयार होते थे। अभिषेक के प्रयासों से यह कला एक बार फिर से चर्चाओं में है।

इंजीनियर से शिल्पकार बने अभिषेक
इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद भी अभिषेक ने आधुनिक करियर छोड़ अपनी जड़ों से जुड़ने का निर्णय लिया। उनका मानना है—“संस्कृति ही हमारी पहचान है। अगर हम इसे नहीं बचाएंगे, तो आने वाली पीढ़ियां अपनी परंपरा से दूर हो जाएंगी।”

परिवार से मिली प्रेरणा
अभिषेक बताते हैं कि उनकी परदादी भगैया बाई इस कला में निपुण थीं। वे बच्चों के लिए सुंदर खिलौने बनातीं और लोककथाएं सुनाती थीं। परिवार ने रायपुर के महादेव घाट पुन्नी मेले में भी शिल्प बेचा, जिसने अभिषेक को विरासत से जोड़े रखने में अहम भूमिका निभाई।

भविष्य की दिशा
अभिषेक अब कार्यशालाओं के माध्यम से युवाओं को मटपरई कला सिखा रहे हैं। वे चाहते हैं कि इसे रोजगार से जोड़ा जाए, ताकि न केवल हजारों हाथों को काम मिले, बल्कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिल सके।