रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को रायपुर की विशेष अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। अब वह 6 सितंबर तक रायपुर जेल में रहेंगे।
इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें 5 दिनों तक कस्टोडियल रिमांड पर रखकर शराब घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े नए तथ्यों पर पूछताछ की थी। जांच में सामने आए इन तथ्यों के आधार पर ED जल्द ही कई होटल और रियल एस्टेट कारोबारियों को समन जारी कर सकती है।
16.70 करोड़ रुपए लेने का आरोप
ED ने आरोप लगाया है कि चैतन्य बघेल को शराब घोटाले से 16.70 करोड़ रुपये मिले। ये रकम रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में निवेश के नाम पर लगाई गई। जांच में पाया गया कि ब्लैक मनी को वाइट करने के लिए फर्जी निवेश और नकली ट्रांजेक्शन का सहारा लिया गया।
एजेंसी का कहना है कि इस सिंडिकेट ने मिलकर 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध हैंडलिंग की है।

‘विट्ठल ग्रीन प्रोजेक्ट’ में हुआ निवेश
ED की जांच में खुलासा हुआ कि बघेल डेवलपर्स का विट्ठल ग्रीन प्रोजेक्ट घोटाले की रकम से जुड़ा हुआ है। प्रोजेक्ट का वास्तविक खर्च लगभग 13–15 करोड़ रुपये था, लेकिन दस्तावेज़ों में केवल 7.14 करोड़ दिखाया गया।
इसके अलावा, एक ठेकेदार को 4.2 करोड़ कैश पेमेंट किया गया, जिसे आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया था।
फर्जी फ्लैट खरीद से मनी लॉन्ड्रिंग
ED ने बताया कि कारोबारी त्रिलोक सिंह ढिल्लन ने 19 फ्लैट अपने कर्मचारियों के नाम पर खरीदे, लेकिन भुगतान खुद किया। ये पूरा लेन-देन 19 अक्टूबर 2020 को एक ही दिन में हुआ था। एजेंसी का दावा है कि यह ब्लैक मनी को छिपाने और चैतन्य बघेल तक पहुंचाने की सुनियोजित योजना थी।

ज्वेलर्स के जरिए कैश को किया वाइट
जांच में सामने आया कि भिलाई के एक ज्वेलर्स ने चैतन्य बघेल को 5 करोड़ रुपए नकद दिए। बाद में इसी ज्वेलर्स ने बघेल की कंपनी से 6 प्लॉट खरीदे, जिनकी कीमत सिर्फ 80 लाख थी। ED का कहना है कि यह नकद रकम शराब घोटाले से आई थी, जिसे बैंकिंग लेन-देन के जरिए वैध दिखाने की कोशिश की गई।
फ्रंट कंपनियों का इस्तेमाल
एजेंसी ने दावा किया कि घोटाले की रकम को छुपाने के लिए कई फ्रंट कंपनियों और व्यक्तियों का इस्तेमाल किया गया। पैसा पहले ढिल्लन सिटी मॉल में आया, फिर ढिल्लन ड्रिंक्स से कर्मचारियों तक पहुंचा और उसके बाद बघेल डेवलपर्स में निवेश किया गया।
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले का बैकग्राउंड
ED की जांच के मुताबिक, इस घोटाले का दायरा 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का है। इसमें IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के तत्कालीन MD AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर समेत कई बड़े नाम शामिल बताए गए हैं।
यह पूरा सिंडिकेट भूपेश सरकार के कार्यकाल में सक्रिय था।