छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क उसी अनुपात में नहीं बढ़ पाया है। चार साल पहले जहां सालभर में महज 6 हजार ईवी बिकते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 25 हजार से ज्यादा हो गई है। परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार अगस्त 2025 तक राज्य की सड़कों पर 1.49 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक गाड़ियां दौड़ रही हैं।
फिर भी पूरे राज्य में अभी सिर्फ 290 चार्जिंग स्टेशन ही मौजूद हैं। इनमें से आधे से ज्यादा रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग में हैं, जबकि बाकी जिलों को मिलकर आधी संख्या ही मिलती है। इस साल के अंत तक चार्जिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ाकर 500 करने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार ने सभी ई-व्हीकल डीलरों को निर्देश दिया है कि वे अपने शोरूम या बिक्री केंद्र पर कम से कम एक चार्जिंग स्टेशन जरूर लगाएं। पेट्रोल पंप मालिकों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है कि वे अपने बड़े परिसरों में चार्जिंग पॉइंट स्थापित करें। इसके लिए वे चार्जिंग मशीन उपलब्ध कराने वाली कंपनियों के साथ एमओयू कर सकते हैं।
2027 तक 5 लाख से अधिक ईवी
परिवहन विभाग का अनुमान है कि 2027 तक राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या 5 लाख से ज्यादा हो जाएगी। ऐसे में चार्जिंग ढांचे का विस्तार अनिवार्य है। रायपुर नगर निगम ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए निजी कंपनियों के साथ एमओयू कर छह से अधिक नए चार्जिंग स्टेशन खोले हैं। अब अन्य नगर निगमों को भी यही पहल करनी होगी।
नए चार्जिंग स्टेशनों के लिए प्लान
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डीलरों के लिए चार्जिंग स्टेशन खोलना अनिवार्य किया जाएगा।
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पेट्रोल पंपों को रियायत देकर वहां चार्जिंग पॉइंट लगाए जाएंगे।
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नेशनल और स्टेट हाईवे पर चार्जिंग व बैटरी स्वैपिंग स्टेशन के लिए जमीन कम किराए पर दी जाएगी।
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फ्लाईओवर के नीचे दोपहिया वाहनों के लिए सस्ते चार्जिंग पॉइंट बनाए जाएंगे।
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सरकारी कार्यालयों की पार्किंग में भी चार्जिंग सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
ईवी मालिकों की मुश्किलें
ईवी उपयोगकर्ताओं का कहना है कि चार्जिंग स्टेशनों की कमी से लंबी दूरी की यात्रा करना कठिन हो जाता है। कारोबारी स्वप्निल मिश्रा ने बताया कि उनकी गाड़ी एक बार फुल चार्ज में अधिकतम 200 किलोमीटर चलती है, इसलिए बस्तर या गरियाबंद जैसे क्षेत्रों में चार्जिंग की सुविधा न होने से वे मजबूरी में पेट्रोल कार का सहारा लेते हैं।
वहीं रायपुर के व्यापारी चेतन साहू का कहना है कि उन्हें गाड़ी खरीदते समय 300 किलोमीटर रेंज बताई गई थी, लेकिन हकीकत में यह 150 किलोमीटर से ज्यादा नहीं चलती। रायपुर से ओडिशा तक भी कोई चार्जिंग स्टेशन नहीं होने से हमेशा डर बना रहता है।
परिवहन विभाग के अतिरिक्त आयुक्त डी. रविशंकर ने कहा कि डीलरों को समझाइश दी जा रही है, और अगर वे नहीं मानते तो चार्जिंग स्टेशन अनिवार्य कर दिए जाएंगे। साथ ही कई सरकारी योजनाओं के तहत भी नए चार्जिंग स्टेशन खोले जाएंगे।