रायपुर के पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज और आंबेडकर अस्पताल को प्रदेश का स्टेट ऑफ आर्ट संस्थान बनाने की योजना पिछले तीन सालों से ठंडे बस्ते में पड़ी है। करीब 150 करोड़ रुपये की एडवांस मशीनें लगाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, लेकिन मंजूरी न मिलने से पूरा प्रोजेक्ट अधर में लटक गया।
फाइल सीधे स्वास्थ्य मंत्री तक पहुंचाई गई थी, मगर उस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी बीच अस्पताल और कॉलेज में लगी पुरानी मशीनें जवाब देने लगी हैं। हालत यह है कि 80 करोड़ से अधिक कीमत की सीटी स्कैन, एमआरआई और डीएसए जैसी कई मशीनें अब कंडम या एक्सपायर हो चुकी हैं।
मरीजों को बाहर करानी पड़ रही जांच
सीटी इंजेक्टर मशीन खराब होने के कारण मरीजों की एंजियोग्राफी रुक गई है। यहां जांच न होने से उन्हें बाहर 8,500 रुपये खर्च कर टेस्ट कराना पड़ रहा है। वहीं, एमआरआई और सीटी स्कैन मशीनें भी लगातार खराब हो रही हैं।
डीएसए मशीन, जो 2009 में जर्मनी से खरीदी गई थी, कंपनी ने अब कंडम घोषित कर दी है। कैंसर विभाग की सीटी सिम्युलेटर मशीन तीन साल पहले ही एक्सपायर हो गई, जिससे पूरा दबाव सीटी स्कैन पर है।
प्रयोगशालाओं की हालत भी खराब
बायो केमेस्ट्री, पैथोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी विभाग की मशीनें काफी पुरानी हो चुकी हैं। पैथोलॉजी लैब का एनालाइजर खराब है, इसलिए यहां अब मैनुअल रिपोर्ट बनाई जा रही है। डिजिटल रेडियोग्राफी एक्सरे मशीन भी दो साल पहले बंद हो गई।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि 22 करोड़ की पेट सीटी और गामा मशीन सात साल से अधिक समय पहले लगाई गई थी, लेकिन आज तक शुरू नहीं हो पाई। नतीजा यह है कि मरीजों को बाहर जाकर 22 से 25 हजार रुपये खर्च कर जांच करानी पड़ रही है।
तत्काल जरूरत
तत्कालीन डीएमई डॉ. विष्णु दत्त का कहना है कि यह अस्पताल टर्शरी सेंटर है, जहां रोजाना बड़ी संख्या में मरीज आते हैं। यहां नई और एडवांस मशीनें जरूरी हैं, ताकि किसी भी मरीज को जांच के बिना लौटना न पड़े। लेकिन शासन की मंजूरी के बिना यह परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही है।