राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगातार हो रही दुर्घटनाओं और सड़कों पर मवेशियों की बढ़ती समस्या पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान कहा कि अब हाइवे पर मवेशियों के चलते होने वाले हादसे किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं होंगे।
कोर्ट ने राज्य सरकार और एनएचएआई को आदेश दिया कि इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए तुरंत ठोस कदम उठाए जाएं।
कंपनियों का तर्क – जिम्मेदारी हमारी नहीं
बिलासपुर-पथरापाली रोड प्राइवेट लिमिटेड ने पत्र लिखकर कहा कि सड़क पर मवेशियों की समस्या स्थायी गौशालाओं के अभाव में बनी हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनकी जिम्मेदारी नहीं है, फिर भी लोगों की सुरक्षा के लिए उन्हें करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
एनएचएआई की कार्रवाई
कोर्ट के निर्देश पर एनएचएआई ने मंगलवार को शपथ पत्र पेश किया। इसमें बताया गया कि:
-
तीन रूट पर पेट्रोलिंग वाहन लगाकर निगरानी बढ़ाई गई है।
-
पेंड्रीडीह में 20×20 मीटर का मवेशी चबूतरा बनाया जा रहा है।
-
रतनपुर और बेलमुंडी में शेड निर्माण का प्रस्ताव तैयार है।
-
7.35 किमी लंबी बांस की बाड़ लगाने का टेंडर जारी किया गया।
-
टोल प्लाजा से घोषणाएं की जा रही हैं और पर्चों के जरिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
-
मवेशियों को हटाने के लिए टीमें और मजदूर दिन-रात तैनात हैं।
-
मवेशियों को रिफलेक्टिव बेल्ट पहनाई जा रही है और सड़कों पर स्ट्रीट लाइट लगाने का काम चल रहा है।
आर्थिक सहयोग
गौशालाओं में रखे मवेशियों के लिए चारा-पानी उपलब्ध कराने के लिए पंचायतों ने सहायता मांगी थी। इस पर एनएचएआई ने 5 लाख रुपये मंजूर किए और राशि जिला पंचायत को सौंप दी।