तिल्दा-नेवरा के उपपंजीयन कार्यालय में डिप्टी रजिस्ट्रार ज्योति रात्रे की अनियमित उपस्थिति को लेकर ग्रामीणों में भारी असंतोष है। जहां बाकी सरकारी दफ्तर सुबह 10 बजे से नियमित रूप से खुलते हैं, वहीं डिप्टी रजिस्ट्रार कभी दोपहर 12 बजे, तो कभी 2 बजे कार्यालय पहुंचती हैं। इससे रजिस्ट्री कराने आए लोगों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है।
पिछले कुछ समय से कार्यालय में गड़बड़ियों की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिक पैसे देने वालों की रजिस्ट्री को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि सामान्य लोग कई-कई दिन तक चक्कर काटते रह जाते हैं। सतभांवा गांव के एक मामले में तो किसान और उनके पोते को जबरन गिफ्ट डीड कराने का दबाव डाला गया।
जब मीडिया ने इस विषय में सवाल किए तो डिप्टी रजिस्ट्रार ज्योति रात्रे ने उल्टा मीडिया को ही ‘गोदी मीडिया’ कह दिया। उन्होंने देर से कार्यालय आने की बात स्वीकार की, लेकिन यह भी कहा कि वे ओवरटाइम करती हैं।
किसानों ने किया था विरोध
ग्रामीणों का कहना है कि वे सुबह से कार्यालय पहुंच जाते हैं, लेकिन डिप्टी रजिस्ट्रार के देर से आने के कारण उन्हें बिना काम के लौटना पड़ता है। इससे नाराज होकर किसानों ने पहले भी विरोध प्रदर्शन किया था।
रजिस्ट्री के नाम पर पैसों की वसूली का आरोप
गांव वालों का कहना है कि दस्तावेज लेखकों और बिचौलियों के जरिए अतिरिक्त पैसे मांगे जाते हैं। इस पर जब डिप्टी रजिस्ट्रार से पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें सीधे कोई पैसा नहीं देता। यदि किसी ने दिया है, तो वह सामने आकर कहे। उन्होंने बाकी मामलों की जिम्मेदारी दस्तावेज लेखकों और अन्य कर्मचारियों पर डाल दी।
ग्रामीणों ने मांग की है कि उपपंजीयन कार्यालय में व्यवस्था सुधारी जाए और समय पर अधिकारी की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।