राजधानी रायपुर जहां एक ओर विकास की रफ्तार पकड़ रहा है, वहीं अपराध का साया शहर की सुरक्षा पर बड़ा खतरा बनता जा रहा है। तेजी से बढ़ती आबादी के साथ अपराध का ग्राफ भी लगातार ऊपर जा रहा है। अब स्थिति यह है कि हर साल दर्ज होने वाले केस 17 हजार के पार पहुंच गए हैं। ऐसे में विशेषज्ञ और आम नागरिक दोनों ही पुलिस कमिश्नरी सिस्टम को लागू करने की मांग कर रहे हैं।
अपराध का बदलता पैटर्न
रायपुर में चाकूबाजी और हत्याओं के मामले सबसे बड़ी चिंता बन गए हैं। इस साल अब तक 40 से अधिक हत्याएं और करीब 50 चाकूबाजी की वारदातें दर्ज हो चुकी हैं। खास बात यह है कि इन अपराधों में शामिल अधिकांश आरोपी पहली बार अपराध कर रहे हैं, जिनका कोई पुराना रिकॉर्ड नहीं है।
सिर्फ हिंसक अपराध ही नहीं, बल्कि साइबर फ्रॉड, ऑनलाइन सट्टा, मवेशी तस्करी, धर्मांतरण और विदेशी नेटवर्क से जुड़े नशे के कारोबार जैसे मामलों में भी इजाफा हुआ है। अब हेरोइन और एमडीएमए जैसे खतरनाक ड्रग्स संगठित गिरोहों के जरिए रायपुर तक पहुंच रहे हैं।
हर साल बढ़ रहा अपराध ग्राफ
साल 2023 में रायपुर जिले में कुल 16,125 केस दर्ज हुए थे, जो 2024 में बढ़कर 17,193 हो गए। यानी एक साल में ही लगभग 1,000 मामले बढ़े। वहीं, 2025 के सिर्फ 8 महीनों में ही 7,000 से ज्यादा केस दर्ज हो चुके हैं। हत्या, लूट, डकैती और धोखाधड़ी जैसे गंभीर अपराधों का आंकड़ा भी हर साल बढ़ता दिख रहा है।
मौजूदा सिस्टम की दिक्कतें
फिलहाल रायपुर पुलिस जिला प्रशासन पर निर्भर है। अपराधियों पर जिलाबदर, एनएसए जैसी कड़ी कार्रवाई के लिए पुलिस को प्रशासन की मंजूरी लेनी पड़ती है। इस प्रक्रिया में होने वाली देरी कई बार अपराधियों को फायदा पहुंचाती है और उनके हौसले बुलंद रहते हैं।
क्यों ज़रूरी है पुलिस कमिश्नरी सिस्टम?
दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों में पहले से लागू पुलिस कमिश्नरी सिस्टम से अपराध नियंत्रण में काफी मदद मिली है। इस व्यवस्था के तहत पुलिस को प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर तत्काल फैसले लेने का अधिकार मिलता है।
अगर रायपुर में यह सिस्टम लागू होता है तो—
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अपराधियों पर त्वरित और सख्त कार्रवाई हो सकेगी।
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संगठित अपराध और नशे के कारोबार पर अंकुश लगेगा।
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आम नागरिकों को सुरक्षा का भरोसा बढ़ेगा।
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पुलिस की जवाबदेही और कार्रवाई की क्षमता मजबूत होगी।