धमतरी में हुई चाकूबाजी की खौफनाक वारदात ने रायपुर के तीन परिवारों को बेसहारा कर दिया। तीनों मृतक—आलोक ठाकुर, सुरेश तांडी और नितीन तांडी—अपने-अपने घर के मुख्य कमाने वाले थे। इनमें आलोक घर का इकलौता बेटा था, जिस पर बुजुर्ग माता-पिता की पूरी जिम्मेदारी थी।

रविवार रात तीनों दोस्त दो अन्य साथियों के साथ “जल्दी लौटने” का कहकर घर से निकले थे। परिजनों ने पूरी रात उनका इंतजार किया, लेकिन अगले दिन उनका शव घर पहुंचा। सेजबहार निवासी आलोक की एक दिन पहले ही शादी तय हुई थी। 2015-16 में पिता का एक्सीडेंट हुआ, जिसके बाद उन्होंने आत्महत्या कर ली थी। तब से आलोक ने ठेकेदारी करके परिवार संभाला। बहन ने कहा—”एक दिन पहले राखी बांधी थी, अब भाई चला गया। हत्यारों को फांसी होनी चाहिए।”

सुरेश तांडी की दो साल की बेटी अपने पिता के शव को देखकर बार-बार कह रही थी—”पापा उठो न”—जिसे देख सभी की आंखें भर आईं। बहन नीरा ने बताया कि राखी के दिन सुरेश ने उसकी रक्षा का वादा किया था, लेकिन अब वह भी नहीं रहा। वहीं, नितीन तांडी रोज की तरह धमतरी गया था, लेकिन लौटकर नहीं आया। उसकी मां का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि पत्नी और दो छोटे बच्चों का सहारा भी छिन गया।
वारदात कैसे हुई
11 अगस्त की रात 11:08 बजे—नशे में धुत आठ बदमाश मां अन्नपूर्णा ढाबा के सामने सड़क पर गुजरते वाहनों को रोककर मारपीट और लूटपाट की कोशिश कर रहे थे।
11:15 बजे—रायपुर से चार युवक कार में ढाबा पहुंचे। बदमाशों ने गाली-गलौज कर दो युवकों पर खंजर से हमला किया। दोनों स्टेट हाईवे पर खून से लथपथ गिर पड़े और उनकी मौत हो गई।
11:21 बजे—एक अन्य युवक भागा, लेकिन 100 मीटर दूर उसे भी घेरकर छाती में वार किया गया। घायल युवक 50 मीटर दूर टायर दुकान तक पहुंचा, लेकिन दम तोड़ दिया।
तीनों के शव एक साथ रायपुर लाए गए और संतोषी नगर मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार किया गया। पूरे इलाके में इस तिहरे कत्ल से मातम पसरा है और लोग हत्यारों को सख्त सजा देने की मांग कर रहे हैं।