बिलासपुर जिले में सड़क दुर्घटना पीड़ितों को तुरंत राहत देने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने इस साल ‘नकदी रहित उपचार योजना 2025’ की शुरुआत की थी। योजना का उद्देश्य हादसे में घायल व्यक्तियों को आयुष्मान योजना से संबद्ध अस्पतालों में 7 दिन तक अधिकतम डेढ़ लाख रुपए तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराना है। साथ ही, घायलों को अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति को 25 हजार रुपए प्रोत्साहन राशि देने का भी प्रावधान है।
योजना लागू हुए करीब ढाई महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक न तो किसी मरीज को इस स्कीम का लाभ मिला है और न ही मददगारों को इनाम की रकम। बिलासपुर जिले में इस योजना के लिए 24 अस्पतालों को नामित किया गया था, जिनमें ट्रॉमा और पॉलीट्रॉमा सेंटर को प्राथमिकता दी गई।
नियम के अनुसार, हादसे के बाद पीड़ित को नजदीकी आयुष्मान संबद्ध अस्पताल में भर्ती किया जाना चाहिए। यदि वहां आवश्यक संसाधन या विशेषज्ञ डॉक्टर न हों तो मरीज को तुरंत सक्षम अस्पताल में शिफ्ट कर पोर्टल पर जानकारी दर्ज की जानी चाहिए। लेकिन वास्तविकता यह है कि निजी अस्पतालों ने अब तक उपचार शुरू नहीं किया है और कैशलेस सुविधा कागजों तक ही सीमित है।
अधिकारियों के बयान
सीएमएचओ बिलासपुर, डॉ. शुभा गरेवाल ने कहा कि यह योजना राजधानी रायपुर से संचालित है, इसलिए उन्हें इसकी विस्तृत जानकारी नहीं है। वहीं, एएसपी ट्रैफिक रामगोपाल करियारे का कहना है कि इलाज तो चल रहा है, लेकिन राशि जारी होने की प्रक्रिया प्रशासनिक स्तर पर अटकी हुई है।
जनता की उम्मीदें
हर साल सड़क दुर्घटनाओं में हजारों लोग घायल होते हैं और समय पर इलाज न मिलने से कई की जान चली जाती है। ऐसे में यह स्कीम जरुरतमंदों के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकती है, यदि इसे सही ढंग से लागू किया जाए। फिलहाल लोग इंतजार कर रहे हैं कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग अपने वादों को जमीन पर उतारे।
मुख्य प्रावधान
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प्रति व्यक्ति इलाज पर अधिकतम ₹1.5 लाख का खर्च सरकार उठाएगी
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एक ही परिवार के 2 लोगों के घायल होने पर ₹3 लाख, 3 के लिए ₹4.5 लाख तक की सीमा
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7 दिन तक इलाज पूरी तरह मुफ्त
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पीड़ित को अस्पताल पहुंचाने वाले को ₹25,000 का इनाम
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सभी आयुष्मान संबद्ध अस्पतालों में लागू
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जरुरी संसाधन न होने पर तुरंत दूसरे अस्पताल में शिफ्ट कर पोर्टल पर अपडेट