रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बुधवार को जल संसाधन विभाग की लंबित परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि अधूरी जल परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए, ताकि किसानों को उनकी पूरी क्षमता का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सिंचाई क्षमता अधूरी परियोजनाओं की वजह से बाधित हो रही है, जिससे कृषि उत्पादन पर असर पड़ता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संसाधन विभाग निर्माण कार्यों की गति को तेज करे और ठोस रणनीति अपनाकर प्रगति सुनिश्चित करे। विशेष रूप से 2015 से पहले की अधूरी परियोजनाओं को प्राथमिकता देते हुए जल्द से जल्द पूर्ण किया जाए।
बैठक में विभागीय सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से प्रदेशभर की सिंचाई परियोजनाओं की स्थिति और प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बोधघाट बहुउद्देशीय परियोजना, इंद्रावती-महानदी इंटरलिंकिंग योजना और शेखरपुर व डांडपानी जलाशयों से संबंधित टेंडर प्रक्रिया को अगले 100 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद राज्य में लगभग 7 लाख हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा विकसित हो सकेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजनाएं किसानों के लिए “जीवनदायिनी” साबित होंगी और विशेष रूप से बस्तर संभाग में कृषि विकास के नए रास्ते खोलेंगी।
वर्तमान में बस्तर के 8.15 लाख हेक्टेयर बोये गए क्षेत्रफल में से मात्र 1.36 लाख हेक्टेयर भूमि ही सिंचित है। बोधघाट और इंद्रावती-महानदी इंटरलिंकिंग परियोजनाएं दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा के 269 गांवों को सीधा लाभ पहुंचाएंगी। बोधघाट परियोजना के तहत खरीफ और रबी सीजन में 3.78 लाख हेक्टेयर में सिंचाई की सुविधा विकसित होगी।
इस परियोजना से 125 मेगावाट बिजली उत्पादन, 49 एमएलडी पेयजल आपूर्ति और लगभग 4824 टन वार्षिक मत्स्य उत्पादन के जरिए अतिरिक्त रोजगार भी उत्पन्न होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजनाएं न केवल जल और कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाएंगी बल्कि क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को भी गति देंगी।