छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में ईसाई समुदाय के खिलाफ लगातार हो रही घटनाओं और उनके संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन पर विभिन्न सामाजिक संगठनों ने गहरी चिंता जताई है। सोमवार को जिला कलेक्टर को सौंपे गए 5 सूत्रीय ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने प्रशासन की निष्क्रियता और पक्षपातपूर्ण रवैये पर सवाल उठाए हैं।
जामगांव प्रकरण: कब्र से शव निकालने की कोशिश
ज्ञापन में प्रमुखता से जिक्र किया गया है जामगांव की उस घटना का, जिसमें सोमलाल राठौर नामक एक ईसाई व्यक्ति का अंतिम संस्कार उनकी निजी भूमि पर किया गया था। इसके बावजूद, ग्रामीणों और राजनीतिक दबाव के चलते प्रशासन ने कथित रूप से शव को कब्र से बाहर निकलवाने की कोशिश की। संगठनों का कहना है कि यह न केवल अमानवीय और असंवैधानिक है, बल्कि मृतक के धार्मिक अधिकारों का घोर उल्लंघन भी है।

इसके साथ ही आरोप लगाए गए हैं कि स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी – एसडीएम, तहसीलदार और डीएसपी – ने पीड़ित परिवार और चर्च के पास्टर पर दबाव बनाया कि वे कब्र हटवाएं, अन्यथा चर्च के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। इसी दौरान चर्च पर हमला हुआ और तोड़फोड़ की गई, लेकिन अब तक किसी पर भी कानूनी कार्रवाई नहीं हुई है।
दुर्ग स्टेशन की घटना और दो ननों की गिरफ्तारी
ज्ञापन में दुर्ग रेलवे स्टेशन पर हुई एक अन्य घटना को लेकर भी आपत्ति जताई गई है, जहां बजरंग दल के दबाव में दो ननों को झूठे आरोपों के तहत हिरासत में लिया गया था। बताया गया कि हिरासत के दौरान एक महिला, ज्योति शर्मा, ने ननों को गालियाँ दीं, धमकाया और उनका बैग छीना। सामाजिक संगठनों ने इस महिला पर IPC की धारा 504 और 506 के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

> उल्लेखनीय है कि इस मामले में गिरफ्तार दोनों ननों को दो दिन पहले ज़मानत पर रिहा कर दिया गया है, लेकिन सामाजिक संगठनों का कहना है कि अभी तक असली दोषियों के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं हुई है।
कब्रिस्तान की मांग और भेदभाव का आरोप
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि जिले में ईसाई समुदाय को अंतिम संस्कार हेतु पर्याप्त जगह नहीं दी जा रही है। इसके लिए एक सार्वजनिक कब्रिस्तान के रूप में कम से कम 10 एकड़ भूमि आवंटित करने की मांग रखी गई है।

कुडाल गांव में असंवैधानिक बोर्ड
ज्ञापन में कुडाल गांव की उस घटना का भी जिक्र है जहां गांव में एक बोर्ड लगाया गया है, जिसमें पेसा कानून की अवहेलना करते हुए पास्टरों और ईसाई समुदाय के प्रवेश पर रोक लगाई गई है। संगठनों ने इसे संविधान का सीधा उल्लंघन बताते हुए संबंधित सरपंच और पंचायत के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
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मुख्य मांगे:
1. जामगांव मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई
2. दुर्ग रेलवे स्टेशन पर ननों के साथ बदसलूकी करने वाली महिला पर एफआईआर
3. ईसाई समुदाय के लिए 10 एकड़ जमीन का कब्रिस्तान आवंटन
4. कुडाल गांव से असंवैधानिक बोर्ड हटाया जाए और जिम्मेदारों पर कार्यवाही हो
5. ननों को फँसाने वाले असली दोषियों पर कार्रवाई और पूरे मामले की न्यायिक जांच
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जनता का सवाल:
> “क्या किसी व्यक्ति की मौत के बाद भी उसका सम्मान नहीं बचता?”
“शव को जबरन कब्र से निकालने की कोशिश – क्या यही है प्रशासन की नैतिकता?”
“चर्च पर हमला, धमकी, और फिर भी कोई एफआईआर नहीं?”
“दोषी खुले घूम रहे हैं और ननों को बनाया गया निशाना!”
अपील:
सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से संविधान और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करने की अपील करते हुए कहा कि भारत की असली पहचान तभी कायम रह सकती है जब हर नागरिक को उसके धर्म, आस्था और जीवन की गरिमा की गारंटी मिले