छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य के निजी स्कूलों को सिर्फ एनसीईआरटी (NCERT) और एससीईआरटी (SCERT) की किताबें खरीदने और बेचने के लिए बाध्य करने संबंधी निर्देशों को असंवैधानिक करार देते हुए खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस तरह की शर्तें संविधान के अनुच्छेद 19(1)(जी) के तहत प्रदत्त व्यवसाय की स्वतंत्रता का उल्लंघन करती हैं।
यह याचिका छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन की ओर से दाखिल की गई थी, जिसमें कहा गया था कि विभिन्न जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) ने फरवरी से जून 2025 के बीच आदेश जारी किए थे, जिनमें कक्षा 1 से 10 तक केवल NCERT/SCERT की किताबें अनिवार्य रूप से उपयोग करने की बात कही गई थी। आदेशों में यह भी चेतावनी दी गई थी कि यदि कोई स्कूल इसका उल्लंघन करता है तो उसकी मान्यता रद्द की जा सकती है।
याचिकाकर्ता की दलील
एसोसिएशन की ओर से वकील अशिष श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि सीबीएसई (CBSE) ने 12 अगस्त 2024 को जारी दिशानिर्देशों में केवल यह सलाह दी थी कि कक्षा 1 से 8 तक एनसीईआरटी/एससीईआरटी किताबें उपयोग की जाएं, लेकिन पूरक सामग्री या अन्य किताबों की अनुमति भी दी गई थी। वहीं कक्षा 9 से 12 तक के लिए एनसीईआरटी किताबें अनिवार्य हैं, परंतु जहां ये उपलब्ध नहीं हैं, वहां सीबीएसई की वेबसाइट पर मौजूद सामग्री को भी स्वीकार किया गया है।
कोर्ट का फैसला
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की एकलपीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता स्कूल सीबीएसई से संबद्ध हैं, न कि राज्य शिक्षा बोर्ड से। ऐसे में राज्य के अधिकारी उन्हें सीबीएसई के निर्देशों से परे जाकर किसी प्रकार की बाध्यता नहीं थोप सकते।
कोर्ट ने जिला शिक्षा अधिकारियों द्वारा जारी सभी आदेशों को रद्द कर दिया और साफ कहा कि निजी स्कूल अब बाजार से अपनी पसंद की किताबें और अध्ययन सामग्री खरीद सकते हैं, बशर्ते वे सीबीएसई के नियमों और शैक्षणिक मानकों के अनुरूप हों।
आगे की चेतावनी भी दी
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि यदि कोई स्कूल भविष्य में सीबीएसई के निर्देशों का उल्लंघन करता है या छात्रों को अनुचित सामग्री पढ़ाई जाती है, तो संबंधित अधिकारी उस स्कूल के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होंगे।
यह फैसला निजी स्कूलों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जो बीते कुछ महीनों से इस मुद्दे को लेकर असमंजस और दबाव में थे।