धमतरी। नगर निगम धमतरी पर डीजल घोटाले के गंभीर आरोप कांग्रेस पार्टी ने लगाए हैं। बुधवार को राजीव भवन में मीडिया से चर्चा करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि आरटीआई (सूचना का अधिकार) के माध्यम से उन्होंने यह भ्रष्टाचार उजागर किया है, जिसमें नगर निगम के कई वाहनों के नाम पर भारी मात्रा में डीजल खरीदी गई, जबकि हकीकत में वे वाहन या तो मौजूद नहीं थे या लंबे समय से गैरेज में थे।
नेता प्रतिपक्ष दीपक सोनकर, गीतराम सिन्हा और राजेश ठाकुर ने कहा कि निगम ने बाइक (वाहन क्रमांक CG-05-AL-5794) के नाम पर भी डीजल भरवाया, जबकि बाइक में इतनी डीजल खपत संभव नहीं है। इसके अलावा एक सुमो वाहन (CG-05-AH-5794) जो जनवरी 2025 से गैरेज में मरम्मत हेतु भेजा गया था, उसके नाम पर भी फरवरी से जून 2022 के बीच प्रतिदिन 40 से 50 लीटर डीजल निकाला गया। कांग्रेसियों ने मीडिया को इससे जुड़े दस्तावेज भी दिखाए।
कांग्रेस नेताओं ने महापौर के वाहन में भी प्रतिदिन 29 लीटर डीजल भरवाने का आरोप लगाया और कहा कि धमतरी शहर का क्षेत्रफल छोटा है, इतनी अधिक डीजल की खपत तर्कसंगत नहीं है। इससे स्पष्ट है कि नगर निगम में भ्रष्टाचार चरम पर है।
इस दौरान विशु देवांगन, अविनाश मरोठे, योगेश लाल, गौतम वाधवानी और प्रवीण साहू समेत कई कांग्रेसी कार्यकर्ता मौजूद थे।
विकास कार्यों में लापरवाही का भी आरोप
परवाही का भी आरोपदीपक सोनकर ने आमापारा वार्ड में अधूरे निर्माण कार्य का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि पूर्व महापौर विजय देवांगन के कार्यकाल में यहां नाली निर्माण के लिए भूमि पूजन हुआ और 80% भुगतान भी कर दिया गया। अब उसी कार्य के लिए दोबारा टेंडर बुलाए जा रहे हैं, जिससे सरकारी पैसे की बर्बादी हो रही है।
महापौर ने आरोपों को किया खारिज
महापौर रामू रोहरा ने इन आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि मार्च 2022 में उन्होंने महापौर का पदभार संभाला है और तब से नगर निगम के कार्यों का नियमित निरीक्षण करते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि वाहन से दौरे करने के लिए डीजल तो जरूरी है। अगर किसी के पास ठोस प्रमाण हैं तो लिखित शिकायत करें, वे जांच करवाकर उचित कार्रवाई करेंगे। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है, इसलिए इस तरह के मनगढ़ंत आरोप लगाए जा रहे हैं।
निष्कर्ष: कांग्रेस ने नगर निगम में डीजल और निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर स्थानीय प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है, जबकि महापौर ने इसे विपक्ष की साजिश बताया है। अब देखना होगा कि क्या इस मामले में कोई जांच होती है या यह राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक ही सीमित रह जाएगा।