दंतेवाड़ा। वन विभाग द्वारा जिले में वन महोत्सव को बड़े उत्साह और व्यापक भागीदारी के साथ मनाया जा रहा है। गीदम परिक्षेत्र अंतर्गत कासोली बालक आश्रम में आयोजित कार्यक्रम में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की विशेष गूंज रही। इस अवसर पर स्थानीय ग्रामीणों को 100 से अधिक पौधे वितरित किए गए और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जनपद अध्यक्ष शकुंतला भास्कर ने कहा कि “वनों की रक्षा के लिए जन-जागरूकता सबसे जरूरी है। वृक्ष न केवल पर्यावरण का संतुलन बनाए रखते हैं बल्कि पारंपरिक रूप से बस्तर अंचल में इन्हें देवता के समान माना गया है।” उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने आसपास अधिक से अधिक वृक्षारोपण करें और उनकी देखभाल को भी अपनी जिम्मेदारी समझें।
30 से अधिक पौधे लगाए गए
कार्यक्रम के दौरान स्कूली बच्चों, जनप्रतिनिधियों, वन प्रबंधन समिति के सदस्यों तथा वन विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में 30 से ज्यादा पौधे रोपे गए। ग्रामीणों को ‘एक पेड़ मां के नाम’ योजना के तहत पौधे सौंपे गए, जिससे न केवल पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी बढ़े, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव भी हो।
वन उपज से बेहतर आय की बात
शकुंतला भास्कर ने यह भी कहा कि बस्तर जैसे क्षेत्र में खेतों की तुलना में वनोपज से भी बेहतर आमदनी हो सकती है, यदि उसका सही प्रबंधन और संरक्षण किया जाए।
वन महोत्सव बना जनभागीदारी का प्रतीक
‘पत्रिका हरित प्रदेश अभियान’ के अंतर्गत आयोजित इस महोत्सव में वक्ताओं ने इसे केवल पौधारोपण का कार्यक्रम न मानकर, पर्यावरणीय चेतना का आंदोलन बताया। कार्यक्रम का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को हरियाली से जोड़ना और पर्यावरण के प्रति उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना रहा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता जनपद उपाध्यक्ष दिनेश कौशल ने की। इस मौके पर भाजपा मंडल अध्यक्ष सुधराम भास्कर, सरपंच शैलेश अटामी, सरपंच दिलीप नेताम, जनपद सदस्य राम कोर्राम, और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने लोगों से अपील की कि वे वन महोत्सव को जनांदोलन का रूप दें और पर्यावरण की रक्षा में सक्रिय भाग लें।