भिलाई। कबाड़ को बेकार समझने की आदत आम है, लेकिन पावर हाउस स्थित शासकीय आईटीआई के छात्रों ने इसे एक नई दृष्टि से देखा और कला में तब्दील कर मिसाल कायम की है। प्राचार्य तुषारकांत सतपुते के मार्गदर्शन और रेलवे के प्रसिद्ध कलाकार अशोक देवांगन के निर्देशन में छात्रों ने 15 फीट ऊंचे दो विशाल गिटार तैयार किए हैं, जो पूरी तरह लोहे के स्क्रैप से बनाए गए हैं।
आईटीआई के वेल्डिंग विभाग के दो अलग-अलग बैचों के छात्रों ने इन दो गिटारों को डिजाइन कर तैयार किया है। कबाड़ से कलाकृति बनाने की इस पहल में छात्रों ने लगभग बेकार समझे जाने वाले लोहे के स्क्रैप का ऐसा उपयोग किया, जो कला और कौशल दोनों को दर्शाता है। यह न केवल छात्रों की रचनात्मकता का उदाहरण है, बल्कि उनके तकनीकी कौशल का भी परिचायक है।
इस पूरे प्रोजेक्ट में अशोक देवांगन की भूमिका उल्लेखनीय रही। वे पिछले दो दशकों से स्क्रैप आर्ट में सक्रिय हैं और देशभर के रेलवे कारखानों में उनकी कलाकृतियाँ प्रदर्शित की जा चुकी हैं। वे रेलवे के अप्रेंटिस छात्रों को भी प्रशिक्षण दे चुके हैं और अब आईटीआई के छात्रों को निशुल्क मार्गदर्शन दे रहे हैं।
गिटार निर्माण में प्रशिक्षण अधिकारी पंकज बेलचंदन और अन्य ट्रेनिंग स्टाफ ने भी भरपूर सहयोग किया। इन कलाकृतियों को सुंदर रंग-रोगन के बाद भिलाई के किसी प्रमुख सार्वजनिक स्थल पर स्थापित किया जाएगा, जिससे आम लोग भी इन अद्वितीय रचनाओं को देख सकें और युवाओं में भी प्रेरणा जगे।
प्राचार्य सतपुते ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य केवल सजावट नहीं, बल्कि छात्रों को व्यावहारिक रूप से नया स्किल सिखाना है। आने वाले समय में इसी तरह और कलाकृतियाँ बनाई जाएंगी और स्क्रैप से कुछ नया और उपयोगी बनाने की प्रेरणा छात्रों को दी जाएगी।
इस तरह, कबाड़ से गिटार बनाकर न केवल छात्रों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि जुगाड़ और रचनात्मक सोच से बेकार को भी बेहतरीन में बदला जा सकता है।
यह पहल ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘स्किल इंडिया’ जैसे अभियानों के अनुरूप भी है, जिससे युवाओं का आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता दोनों बढ़ेगा।