राजधानी रायपुर की सड़कों पर आम जनता को ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन करना पड़ता है, लेकिन माननीय मंत्री और विधायक खुद को इन नियमों से ऊपर समझते हैं। एक सप्ताह तक राजधानी के विभिन्न ट्रैफिक पॉइंट्स पर नजर रखी और पाया कि कई मंत्री खुलेआम रेड सिग्नल तोड़ते नजर आए।
शंकर नगर टर्निंग पॉइंट बना उदाहरण
शंकर नगर टर्निंग पॉइंट का सिग्नल टाइमर औसतन 120 सेकंड के लिए रेड होता है। इस दौरान भास्कर टीम ने देखा कि मंत्री लखनलाल देवांगन की गाड़ी (CG02BA0002) और उनके काफिले की दूसरी गाड़ी (CG02AU2261) ने नियमों की अनदेखी करते हुए रेड सिग्नल जंप किया और आगे बढ़ गईं।
कानून सब पर लागू, फिर क्यों नहीं कार्रवाई?
मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 के अनुसार ट्रैफिक सिग्नल सभी के लिए अनिवार्य है – चाहे वह आम नागरिक हो या कोई मंत्री या सांसद। गृह मंत्रालय द्वारा RTI के जवाब में स्पष्ट किया गया है कि सिर्फ राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और विशेष विदेशी मेहमानों के काफिले के लिए ट्रैफिक रोका जा सकता है, बाकी किसी को यह छूट नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने वीआईपी कल्चर पर रोक लगाने को लेकर सख्त टिप्पणी की थी। अदालत ने कहा था कि सायरन और लाल बत्ती का इस्तेमाल स्टेटस सिंबल बन चुका है, जो समाज में असमानता की भावना को बढ़ावा देता है। इसके बाद केंद्र सरकार ने सभी VIP वाहनों पर लाल बत्ती के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी, इसे सिर्फ इमरजेंसी सेवाओं तक सीमित रखा गया है।
सवाल उठता है – जब कानून सबके लिए बराबर हैं, तो फिर इन माननीयों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती?