शहर का प्रमुख पर्यटन स्थल दलपत सागर अब अपनी पहचान खोता जा रहा है। यहां का शांत और सुंदर वातावरण अब नशेड़ियों और असामाजिक तत्वों की गतिविधियों से प्रदूषित हो चुका है। खासकर शाम ढलते ही धरमपुरा मार्ग पर युवक-युवतियों की टोलियां जुटती हैं, जो खुलेआम नशा करते दिखाई देते हैं।
रेलिंग के नीचे खाली पड़ी जगहों पर शराब की बोतलें, डिस्पोजेबल गिलास और प्लास्टिक पैकेटों का अंबार लग चुका है। आधे-अधूरे फुटपाथ अब ‘ओपन बार’ जैसे नजर आते हैं। युवाओं द्वारा यहां जन्मदिन पार्टियों और शराब पार्टी का आयोजन आम बात हो गई है।
रोशनी की कमी बनी असामाजिक गतिविधियों का सहारा
करीब छह महीने पहले यहां लगाई गई स्ट्रीट लाइटें अब बंद हो चुकी हैं, जिससे अंधेरा गहराता जा रहा है। यही अंधेरा अब नशेड़ियों और अपराधियों के लिए सुरक्षित आवरण बन गया है। पहले जो रास्ता ‘मरीन ड्राइव’ जैसा दिखता था, अब डर और असुरक्षा का प्रतीक बन गया है।
गश्त है लेकिन असर नहीं
पुलिस की ओर से दावा किया गया है कि गश्त टीम नियमित रूप से गश्त करती है, लेकिन हकीकत यह है कि नशेड़ी वाहन की आवाज सुनते ही सतर्क हो जाते हैं और बच निकलते हैं। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि कई बार युवक-युवतियों को आपत्तिजनक हालात में भी देखा गया है, पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
स्थानीय लोगों में नाराजगी और डर
रात के समय यह मार्ग इतना सुनसान और असुरक्षित हो जाता है कि परिवारों का यहां से गुजरना मुश्किल हो गया है। कई बार यहां लूटपाट और मारपीट की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। स्थानीय लोगों ने कई बार शिकायत की, लेकिन न तो प्रकाश व्यवस्था ठीक हुई और न ही असामाजिक तत्वों पर कोई कड़ा एक्शन लिया गया।
पुलिस का बयान
भोला सिंह राजपूत, थाना प्रभारी कोतवाली ने कहा,
“पुलिस की पेट्रोलिंग टीम लगातार क्षेत्र में गश्त कर रही है। नशा करने वाले युवकों पर नजर रखी जा रही है और कोई भी आपराधिक गतिविधियों में लिप्त पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की
निष्कर्ष:
दलपत सागर का यह हाल पर्यटन, शांति और सामाजिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। प्रशासन को जल्द ही ठोस कदम उठाकर इस क्षेत्र की पहली जैसी छवि लौटाने की आवश्यकता है।