छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 3200 करोड़ रुपए के शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए शुक्रवार को राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल उर्फ बिट्टू को गिरफ्तार कर लिया। ईडी ने भिलाई स्थित भूपेश बघेल के आवास पर सुबह 6 बजे दबिश दी और करीब 7 घंटे की पूछताछ के बाद चैतन्य को हिरासत में लिया।
गौर करने वाली बात यह है कि गिरफ्तारी के दिन यानी 18 जुलाई को चैतन्य का जन्मदिन था। जब ईडी की टीम पहुंची, उस समय चैतन्य पूजा में लीन थे और भूपेश बघेल विधानसभा सत्र की तैयारी कर रहे थे। इस कार्रवाई की खबर फैलते ही कांग्रेस समर्थक भूपेश के घर के बाहर जुट गए और जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
रायपुर में कोर्ट ने दी 5 दिन की रिमांड
गिरफ्तारी के बाद चैतन्य को रायपुर लाया गया, जहां उन्हें विशेष अदालत में पेश किया गया। अदालत ने ईडी को 5 दिन की रिमांड दी है, यानी चैतन्य 22 जुलाई तक ईडी की हिरासत में रहेंगे। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि उन्हें प्रतिदिन उनके परिवार और वकीलों से आधे घंटे मिलने की अनुमति दी जाए। साथ ही, उनकी मेडिकल जांच और सीसीटीवी रिकॉर्डिंग की निगरानी के भी आदेश दिए गए हैं।
गिरफ्तारी के विरोध में कांग्रेस का प्रदर्शन
इस कार्रवाई के खिलाफ कांग्रेस ने सख्त रुख अपनाया। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा सत्र का बहिष्कार कर दिया। वहीं रायपुर में ईडी कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया गया। भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई कर रही है।
उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा,
“जन्मदिन का जैसा तोहफा मोदी और शाह जी देते हैं, वैसा कोई और नहीं दे सकता। पहले मेरे जन्मदिन पर मेरे सलाहकारों के घर ईडी भेजी, अब बेटे के जन्मदिन पर मेरे घर।”
ईडी का दावा: 16.7 करोड़ की अवैध कमाई के पुख्ता सबूत
ईडी के अनुसार, चैतन्य बघेल को शराब घोटाले से 16.7 करोड़ रुपये की अवैध आमदनी हुई, जिसका वह कोई वैध स्रोत नहीं बता पाए। यही आधार उनकी गिरफ्तारी का प्रमुख कारण बना। एजेंसी ने बताया कि यह पैसा उनके करीबी कारोबारी अनवर ढेबर और नीतेश पुरोहित द्वारा भेजा गया था।
ईडी ने यह भी खुलासा किया कि दुर्ग के कारोबारी लक्ष्मीनारायण उर्फ पप्पू बंसल और भूपेश बघेल के करीबी तांत्रिक केके श्रीवास्तव ने चैतन्य के खिलाफ बयान दिए हैं। पप्पू ने स्वीकार किया कि उन्हें घोटाले से तीन महीने में 136 करोड़ रुपये मिले, जिनमें से अधिकांश चैतन्य के पास पहुंचाए गए।
निवेश, प्रोजेक्ट और संदिग्ध लेन-देन
चैतन्य बघेल की कंपनी बघेल बिल्डकॉन कुम्हारी में 1300 करोड़ रुपये के विट्ठल ग्रीन सिटी प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। इसके अलावा उन्होंने अन्य कई कंपनियों में भी पैसा लगाया है। एक सराफा कारोबारी ने भी कबूल किया है कि चैतन्य ने उन्हें बिना ब्याज के 5 करोड़ रुपये दिए थे, जो आज तक वापस नहीं हुए।
आगे और गिरफ्तारियों की संभावना
ईडी का कहना है कि पूछताछ में जो जानकारियां सामने आई हैं, उनसे यह स्पष्ट है कि पूरा नेटवर्क काफी बड़ा है और इसमें कई प्रभावशाली लोग शामिल हो सकते हैं। आने वाले दिनों में कुछ और गिरफ्तारियां संभव हैं।
निष्कर्ष:
चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नया तूफान ला दिया है। ईडी की जांच जहां तेजी से आगे बढ़ रही है, वहीं कांग्रेस इसे राजनीतिक साजिश बता रही है। आने वाले दिनों में यह मामला और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।