बिलासपुर से सटे रायगढ़ जिले में मॉनसून के दौरान सांप के काटने की घटनाओं में वृद्धि देखने को मिली है। स्थानीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार, 911 दिनों में कुल 642 लोगों को सांप ने डसा, जिसमें 49 की मृत्यु हो चुकी है
प्रमुख आंकड़े
| विवरण | आंकड़े |
|---|---|
| कुल सांप काटने के मामले | 911 दिनों में 642 |
| मौतें | 49 (ढाई साल में) |
| रोज अस्पताल आने वाले केस | 3–4 |
| पुरुष पीड़ित | 402 |
| महिला पीड़ित | 240 |
| अनुमानित सांप की प्रजातियाँ | लगभग 21 |
मौसम और ख़तरा
-
जून-जुलाई मॉनसून के दौरान सांपों की गतिविधि बढ़ जाती है, और उसी दौरान लोगों पर हमला भी ज्यादा होता है।
-
विशेषतः 2025 के जून महीने में, औसतन प्रति दिन 3–4 नए सर्पदंश मरीज सिम्स अस्पताल पहुँच रहे हैं।

विशेषज्ञों की राय
डॉ. जितेन्द्र नायक (मेडिसिन विभाग) बताते हैं कि लगभग 80 प्रतिशत मामलों में जिस सांप ने काटा, वह अशरीरी (dry bite) था—जहर नहीं छोड़ा। अस्पताल में आने वाले मरीजों में से आधे केस—पिछले ढाई साल में करीब 50 प्रतिशत—ऐसे थे जिनमें विष नहीं था ।
स्नेक कैचर्स के अनुसार, रायगढ़ में करीब 21–24 प्रजातियाँ पाई जाती हैं—कुछ जहरीले, कुछ कम जहरीले, और कुछ बिल्कुल बेनशी (non-venomous)। इनमें प्रमुख हैं:
-
Russell’s viper, Common krait, Indian cobra, Saw‑scaled viper (भारत के “बिग फ़ोर” का हिस्सा)
-
पायथन, कॉमन वूल्फ स्नेक जैसी बेनशी प्रजातियाँ भी आम हैं ।

विश्लेषण और सुझाव
-
सांपका काटना मुख्य रूप से ग्रामीण एवं हाशिए वाले इलाकों में होता है, जहाँ लोग अक्सर जंगल और खेतों में जाते हैं।
-
विषैले काटों का समय‑समय पर इलाज न मिलने पर मृत्युदर बढ़ती है, खासकर यदि एंटी-स्नेक वीनम (ASV) जल्दी नहीं दिया गया।
-
जून से सितंबर तक का समय सांपदंश हेतु उच्च जोखिम काल माना जाता है ।
उपाय:
-
जल्दी उपचार – कटने के तुरंत बाद अस्पताल में पहुँचें और ASV समय पर लें।
-
जल्द पहचान – काटने के बाद विकारों (शरीर गर्म होना, सूजन, साँस लेने में दिक्कत आदि) पर तुरंत मेडिकल सलाह लें।
-
रोकथाम – रात में खेतों या आसपास चलने से बचें; घर में पोशाक, जूते और लालटेन साथ रखें।
-
सामुदायिक जागरूकता – ग्रामीणों को सांपदंश और प्राथमिक चिकित्सा के बारे में जानकारी देने पर जोर दें।
निष्कर्ष
रायगढ़ में मॉनसून के दौरान सांपदंश की घटनाओं का बढ़ना एक गंभीर चिंतास्पद समस्या है। लेकिन समस्या केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं—यह ग्रामीण स्वास्थ्य, आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता और समय पर ASV के प्रयोग से जुड़ी है। इसके लिए:
-
अस्पतालों की आपूर्ति और प्रशिक्षित स्टाफ सुनिश्चित करना
-
सामुदायिक सतर्कता बढ़ाना
-
वन्य जीव प्रबंधन के ज़रिए जोखिम कम करना, जैसे सांप कैचरों का समन्वय और सिस्टमेटिक निगरानी
इन पहलों को लागू कर सांपदंश से बचाव और उपचार की क्षमता को मज़बूत किया जा सकता है।