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बिलासपुर डीपी विप्र कॉलेज को स्वायत्त दर्जा दिलाने के लिए छात्राओं की भूख हड़ताल में तीन की तबीयत बिगड़ी

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बिलासपुर डीपी विप्र कॉलेज को स्वायत्त दर्जा दिलाने के लिए छात्राओं की भूख हड़ताल में तीन की तबीयत बिगड़ी

भूख-हड़ताल पर तीन छात्राओं की तबीयत बिगड़ी

बिलासपुर में डी.पी. विप्र कॉलेज को स्वायत्त (ऑटोनॉमस) दर्जा दिलाने की मांग को लेकर छात्र-छात्राएँ गुरुवार को अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय के परिसर में भूख-हड़ताल पर बैठ गईं। इसके दौरान तीन छात्राओं—अनसुमी खांडे, मीनाक्षी वाकड़े और भावना साहू—की सेहत अचानक बिगड़ गई और उन्हें गंभीर स्थिति में सिम्स अस्पताल ले जाना पड़ा।


 हाईकोर्ट आदेश और विश्वविद्यालय की पहल

  • उच्च न्यायालय का निर्देश:
    8 मई को हाईकोर्ट ने अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय को आदेश दिया था कि वह 30 दिनों में डी.पी. विप्र कॉलेज को ऑटोनॉमस कॉलेज घोषित करे।

  • अपील पर विवाद:
    विश्वविद्यालय ने सिंगल बेंच के आदेश को डिवीजन बेंच में चुनौती दी, लेकिन डिवीजन बेंच ने भी इसकी अपील खारिज कर दी।

  • प्रदर्शन की शुरुआत:
    छात्रों ने 2 जून को पहला ज्ञापन सौंपा और जब 11 जुलाई तक कोई कार्रवाई नहीं हुई तो 17 जुलाई को उन्होंने भूख-हड़ताल शुरू की।


 पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया

  • नायब तहसीलदार विभोर यादव, सीएसपी सिद्धार्थ बघेल और टीआई राहुल तिवारी ने छात्रों को समझाया, लेकिन वे कुलपति से संवाद की मांग पर अड़े रहे।

  • 6 घंटे चले प्रदर्शन के दौरान तीनों छात्राओं की तबीयत नासाज़ हो गई। भावना साहू की स्थिति गंभीर होने पर उन्हें पुलिस वाहन से अस्पताल गया गया।


 प्राचार्य और कॉलेज प्रबंधन की चेतावनी

  • कॉलेज प्राचार्य डॉ. अंजू शुक्ला और अन्य शिक्षकों ने कुलपति से छात्रों की शिकायतों पर चर्चा की और प्रदर्शन स्थगित करने की सलाह दी।

  • प्राचार्य ने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह में कोई फैसला नहीं लिया गया तो वे स्वयं छात्रों के साथ धरने पर बैठ जाएँगी।


 कुलपति का रुख और अगली रणनीति

  • कुलपति आचार्य अरुण दिवाकर नाथ वाजपेयी ने कहा कि यह मामला कॉलेज, विश्वविद्यालय और UGC के बीच व्याप्त प्रक्रिया संबंधी है।

  • उन्होंने बताया कि मामले की समीक्षा ‘वर्क काउंसिल’ में की गई और आगे की अपील सुप्रीम कोर्ट में की जाएगी।

  • कुलपति ने कहा कि कॉलेज ने बिना विश्वविद्यालय अधिसूचना के खुद को ऑटोनॉमस घोषित कर परीक्षाएं भी आयोजित कीं, जिसके चलते ये विवाद उत्पन्न हुआ।


 आगे की राह

  • छात्रों अब एक हफ्ते के भीतर विश्वविद्यालय की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।

  • प्राचार्य और शिक्षकों ने आंदोलन कम हो तो कुछ समय का अंतर प्रभाव डाल सकता है।

  • विश्वविद्यालय शासन कार्य-परिषद की सिफारिश और सुप्रीम कोर्ट में अपील पर गंभीरता से विचार कर सकता है, जिससे अंततः ऑटोनॉमस का निर्णय तय होगा।


निष्कर्ष

यह विवाद स्वायत्तता की कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा है, पर साथ ही यह छात्रों और शैक्षणिक प्रशासन के बीच गतिरोध का प्रतीक भी है। अब यह देखना होगा कि एक सप्ताह में विश्वविद्यालय क्या निर्णय लेता है या क्या मामला सुप्रीम कोर्ट तक जाता है।