रायपुर विकास प्राधिकरण (RDA) द्वारा विकसित की गई कॉलोनियों—कमल विहार, इंद्रप्रस्थ, बोरियाखुर्द और हीरापुर सरोना—के रहवासी लंबे समय से मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इन इलाकों में न तो नियमित सफाई होती है, न ही डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन की व्यवस्था सुचारू है। वहीं, स्ट्रीट लाइटें खराब पड़ी हैं और अंधेरे में लोग असुरक्षा महसूस कर रहे हैं।
तीन साल से हैंड ओवर की प्रक्रिया अधूरी
आरडीए इन कॉलोनियों को रायपुर नगर निगम को हैंड ओवर करना चाहता है। पिछले तीन वर्षों में आरडीए अधिकारियों ने निगम को लगभग 10 पत्र भेजे, और दो साल पहले निगम ने सर्वे भी शुरू किया था। लेकिन उसके बाद यह प्रक्रिया ठप हो गई। इस कारण कॉलोनियों की स्थिति जस की तस बनी हुई है।
मरम्मत के लिए फंड नहीं, आरडीए की मजबूरी
आरडीए के अनुसार, कॉलोनियों की देखरेख का जिम्मा उनके पास है, लेकिन उनके पास मरम्मत और रखरखाव के लिए आवश्यक बजट नहीं है। यही वजह है कि सफाई जैसे जरूरी काम समय पर नहीं हो पाते।
जमीनी हकीकत: कमल विहार में गंदगी और अंधेरा
दोपहर 1:10 बजे – सेक्टर 1, कमल विहार
दैनिक भास्कर की टीम मौके पर पहुंची तो नाले जाम मिले और चेंबर से गंदा पानी सड़क पर बहता दिखा। वहां के निवासी आशीष देवांगन ने बताया कि जब चेंबर चोक हो जाता है, तो उन्हें खुद अपने खर्चे पर सफाई करवानी पड़ती है। ठेकेदार निर्माण के दौरान मलबा खुले चेंबरों में फेंकते हैं, जिससे नालियां जाम हो जाती हैं।
प्राची दीक्षित, एक अन्य निवासी, ने बताया कि कॉलोनी में शाम होते ही अंधेरा छा जाता है, क्योंकि अधिकांश स्ट्रीट लाइटें बंद रहती हैं और पुलिस की गश्त भी बेहद कम होती है।
इंद्रप्रस्थ कॉलोनी में पानी और सफाई दोनों ही संकट में
दोपहर 2:30 बजे – एलआईजी ब्लॉक, इंद्रप्रस्थ कॉलोनी
यहां रहने वाले आकाश कुमार ने बताया कि पानी की मुख्य टंकी से पाइप लाइन अक्सर लीक हो जाती है, और सफाई के नाम पर पानी की आपूर्ति बंद कर दी जाती है। बावजूद इसके, आरडीए हर माह 200 रुपये पानी शुल्क वसूलता है।
कचरा निस्तारण की व्यवस्था भी बदहाल है। डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन की गाड़ियां नियमित नहीं आतीं। लोग मजबूरी में मुख्य गेट के बाहर बनाए गए कचरा डंप स्थल पर ही कचरा फेंक देते हैं, जिसे कई बार तीन दिन बाद उठाया जाता है।
खुले चेंबर और सड़क पर खतरे मंडरा रहे हैं। बारिश के मौसम में ये चेंबर नजर नहीं आते और दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
प्रशासनिक भ्रम और जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते अफसर
नगर निगम आयुक्त विश्वदीप कुमार का कहना है, “मेरे कार्यकाल में आरडीए की ओर से हैंड ओवर को लेकर कोई पत्र नहीं मिला है, इसलिए मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है।”
वहीं, आरडीए का दावा है कि निगम को कई पत्र भेजे जा चुके हैं और हैंड ओवर की प्रक्रिया शुरू करने की पहल की जा चुकी है। इन दोनों विभागों के बयानों में विरोधाभास साफ नजर आ रहा है, और इसका खामियाजा रहवासियों को भुगतना पड़ रहा है।