Home Chhattisgarh news Balod news बालोद का युवा बना किसानों की प्रेरणा: नौकरी छोड़ी, खेत किराए पर लेकर शुरू की जैविक खेती, आज 32 एकड़ का मालिक और 45 लोगों को दे रहे रोजगार

बालोद का युवा बना किसानों की प्रेरणा: नौकरी छोड़ी, खेत किराए पर लेकर शुरू की जैविक खेती, आज 32 एकड़ का मालिक और 45 लोगों को दे रहे रोजगार

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बालोद का युवा बना किसानों की प्रेरणा: नौकरी छोड़ी, खेत किराए पर लेकर शुरू की जैविक खेती, आज 32 एकड़ का मालिक और 45 लोगों को दे रहे रोजगार

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में रहने वाले 33 वर्षीय गोविंदा कुमार ने अपने जज़्बे और मेहनत से खेती को एक नई पहचान दी है। कभी एक निजी कंपनी में फील्ड ऑफिसर के रूप में काम करने वाले गोविंदा ने 2016 में नौकरी छोड़कर खेती की राह चुनी। उन्होंने शुरू में किराए की जमीन पर जैविक खेती की शुरुआत की, और तमाम मुश्किलों और नुकसान के बावजूद हिम्मत नहीं हारी। आज गोविंदा न केवल 32 एकड़ ज़मीन के मालिक हैं, बल्कि 45 लोगों को रोज़गार भी दे रहे हैं।

दूसरे राज्यों के किसानों से मिली प्रेरणा
गोविंदा ने बताया कि नौकरी के दौरान उन्होंने देखा कि हरियाणा और गुजरात जैसे राज्यों के किसान छत्तीसगढ़ में धान के बजाय दूसरी फसलें उगा रहे हैं। इससे उन्हें जैविक खेती में संभावनाएं नज़र आईं। उन्होंने इन किसानों से संपर्क कर जैविक खेती की तकनीकें और आधुनिक तरीकों को सीखा।

जोखिम उठाया, जमीन गिरवी रखकर खेती शुरू की
गोविंदा ने खेती शुरू करने के लिए अपना घर गिरवी रख 10 लाख रुपए का लोन लिया। उन्होंने 3 एकड़ जमीन किराए पर लेकर खरबूज की खेती से शुरुआत की। शुरुआती दो-तीन साल घाटे का सौदा रहे, और फिर 2020 में कोरोना ने भी नुकसान पहुंचाया। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

लगातार मेहनत का फल मिला
धीरे-धीरे उन्होंने अपनी खेती का दायरा बढ़ाया और पपीता, कलिंदर, मिर्च, टमाटर, नारियल जैसी फसलों की ओर रुख किया। आय बढ़ी तो उन्होंने खुद की जमीन खरीद ली। अब गोविंदा की 32 एकड़ जमीन में जैविक पद्धति से खेती हो रही है और जिले के 100 से ज्यादा किसान उनसे प्रेरणा लेकर जैविक खेती से जुड़ चुके हैं।

तकनीक और नवाचार से बनाई अलग पहचान
गोविंदा ने खेती में आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया है। उन्होंने टपक सिंचाई प्रणाली अपनाई जिससे 70% पानी की बचत हो रही है। खेती की निगरानी के लिए उन्होंने अपने खेतों में सीसीटीवी कैमरे भी लगवाए हैं।

खेती के साथ रोजगार भी
उनकी खेती से अब कर्रेगांव और झीटिया गांव के 45 लोगों को प्रतिदिन काम मिल रहा है। साथ ही नारियल के 700 पौधे भी उन्होंने ढाई एकड़ भूमि में लगाए हैं।

गोविंदा की सफलता की कहानी बताती है कि अगर संकल्प मजबूत हो तो खेती भी किसी स्टार्टअप से कम नहीं होती।