15 साल पुराने सरकारी वाहन चलाने पर उठे सवाल, आरटीओ ने मांगी जानकारी
बालोद ज़िले में जहां एक ओर 15 साल से अधिक पुराने वाहनों का रजिस्ट्रेशन रद्द करने की प्रक्रिया बीते एक साल से चल रही है, वहीं दूसरी ओर सरकारी विभागों में नियमों को ताक पर रखकर खुलेआम 15 से 20 साल पुराने कंडम वाहनों का उपयोग जारी है। कई ऐसे वाहन विभागों द्वारा उपयोग में लिए जा रहे हैं, जिनकी न तो आरसी बुक है और न ही कोई वैध दस्तावेज। इनमें से कई वाहनों की हालत बेहद खराब है, लेकिन उन्हें मरम्मत और पेंटिंग के जरिए फिर से सड़कों पर उतार दिया गया है।
इन वाहनों के कारण न सिर्फ पर्यावरण को खतरा है, बल्कि किसी दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना भी मुश्किल हो जाएगा। स्वास्थ्य विभाग, पीएचई और अन्य कई शासकीय विभागों में ऐसे पुराने वाहनों का उपयोग अब भी हो रहा है, जबकि दूसरी ओर सरकार प्रदूषण रोकने के लिए पुराने वाहनों को सड़कों से हटाने की मुहिम चला रही है।
आरटीओ के पास सौ से ज्यादा पुराने वाहनों की सूची
जिला परिवहन विभाग ने विभिन्न सरकारी कार्यालयों से जानकारी मंगाई है कि कितने विभाग अब भी पुराने वाहनों का उपयोग कर रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जिले में करीब 100 से अधिक वाहन ऐसे हैं जो 15 साल या उससे ज्यादा पुराने हैं। बालोद के गठन से पहले ये वाहन दुर्ग जिले में पंजीकृत हुए थे, लेकिन अब भी बालोद के गुरुर, डौंडी, गुंडरदेही और अन्य इलाकों में दौड़ रहे हैं।
दुर्ग जिले में जहां पुराने वाहनों का सरकारी उपयोग पूरी तरह बंद हो चुका है, वहीं बालोद में अब भी इनकी आवाजाही बनी हुई है।
स्वास्थ्य और पीएचई विभाग में भी पुराने वाहन चालू
स्वास्थ्य विभाग के पास ऐसे वाहन हैं जो करीब 18 साल पुराने हैं। विभाग की टीमें इन्हीं पुराने वाहनों से गांव और स्वास्थ्य केंद्रों के दौरे करती हैं। इनमें वाहन नंबर सीजी 02-4103 और सीजी 02-2341 शामिल हैं। पीएचई विभाग में भी 2007 मॉडल का वाहन सीजी 02-3530 अब भी उपयोग में है।
कार्रवाई की तैयारी में आरटीओ
जिला परिवहन अधिकारी का कहना है कि जिन-जिन विभागों में 15 साल से अधिक पुराने वाहनों की जानकारी मिली है, उन्हें चिन्हांकित किया जा रहा है। ऐसे वाहनों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इस लापरवाही से साफ है कि नियमों की अनदेखी कर सरकारी विभाग खुद ही सार्वजनिक सुरक्षा और पर्यावरण के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।