बालोद जिले में मलेरिया के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। पिछले छह महीनों में जिले भर में 95 से अधिक मरीज सामने आ चुके हैं। सबसे ज्यादा मामले जून महीने में दर्ज किए गए, जिनकी संख्या 35 रही। हालांकि मरीजों के इलाज के लिए दवाएं मौजूद हैं, मगर मच्छर नियंत्रण के लिए जरूरी DDT और मच्छरदानियों की अब तक आपूर्ति नहीं हो पाई है।
डौंडी बना मलेरिया हॉटस्पॉट
जिले का डौंडी विकासखंड सबसे ज्यादा प्रभावित है। यहां अब तक 57 मलेरिया के मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से बताया गया कि मलेरिया की रोकथाम के लिए गड्ढों में पानी जमा होने वाले स्थानों पर DDT का छिड़काव किया जाना जरूरी है, लेकिन अप्रैल में शासन को भेजी गई मांग के बाद भी अब तक इसकी आपूर्ति नहीं हो पाई है।
जांच लक्ष्य और संसाधनों की कमी
जिले में 1.28 लाख लोगों की मलेरिया जांच का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें से अब तक 78,595 लोगों की जांच हो चुकी है। लेकिन बड़ी संख्या में रैपिड टेस्ट किट की कमी भी सामने आई है। फरवरी में केवल 10 हजार किट ही भेजी गईं, जिससे अधिकांश जांच स्लाइड के माध्यम से करनी पड़ रही है।
जिलावार मरीजों की संख्या
-
बालोद: 3
-
डौंडी: 57
-
डौंडीलोहारा: 13
-
गुरुर: 15
-
गुंडरदेही: 17
कुल: 95 मरीज
मच्छरदानी की कमी बनी बड़ी चुनौती
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि मरीजों को बचाव के लिए मच्छरदानी वितरण भी जरूरी है, लेकिन इसकी भी उपलब्धता नहीं हो सकी है। विभाग का कहना है कि DDT और मच्छरदानी की डिमांड शासन को पहले ही भेज दी गई थी।
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. जीआर रावटे ने कहा:
“हमने जिले में मलेरिया की जांच तेज कर दी है। जहां केस ज्यादा आ रहे हैं, वहां विशेष निगरानी रखी जा रही है। मच्छरदानी और डीडीटी की आपूर्ति की प्रक्रिया शासन स्तर पर जारी है।”
बालोद में मलेरिया नियंत्रण को लेकर स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता बनी हुई है, लेकिन संसाधनों की कमी अभियान की रफ्तार पर असर डाल रही है। जल्द उपाय नहीं किए गए तो हालात और बिगड़ सकते हैं