छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में जैविक खेती की एक प्रेरणादायक मिसाल सामने आई है। दंतेवाड़ा जिले के कसौली गांव के प्रगतिशील किसान सुरेश कुमार नाग ने परंपरागत खेती से हटकर न सिर्फ जैविक खेती को अपनाया, बल्कि इसमें लगातार नए प्रयोग भी किए हैं।
सुरेश कुमार जिले के पहले किसान हैं जिन्होंने मेडागास्कर पद्धति से धान की खेती शुरू की। इस तकनीक से उन्होंने कम पानी में बेहतर उत्पादन हासिल किया और खेती की लागत को लगभग 50% तक घटा दिया। पारंपरिक पद्धति की तुलना में मेडागास्कर विधि में खेत में पानी भरने की आवश्यकता नहीं होती, केवल जड़ों में नमी बनाए रखना पर्याप्त होता है। इसके चलते बीज की खपत भी 76% तक कम हो गई — जहां पहले 30-50 किलो बीज लगते थे, वहीं अब सिर्फ 8-12 किलो में ही काम हो रहा है।

सुरेश बाजार के रासायनिक कीटनाशकों के बजाय खुद के बनाए जैविक उत्पाद जैसे जीवामृत का इस्तेमाल करते हैं। साथ ही उन्होंने चरोटा, शनई और डेन्चा जैसी दलहनी फसलों की बुवाई कर उन्हें हरी खाद के रूप में इस्तेमाल किया, जिससे मिट्टी की जैविक नाइट्रोजन बढ़ी और जलधारण क्षमता में सुधार आया।
कतार पद्धति से बुवाई के चलते पौधों को अधिक धूप और वायुसंचार मिला, जिससे उनकी वृद्धि बेहतर हुई। आज सुरेश 50 से अधिक किसानों को जैविक खेती की तकनीक सिखा चुके हैं और अब जैविक किसानों का एक समूह बनाकर जीवामृत, बीजामृत, हंडी दवा और मछली टॉनिक जैसी विधियों का प्रशिक्षण भी दे रहे हैं।
उनकी यह पहल न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि किसानों को कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली साबित हो रही है। सूखा प्रभावित इलाकों में सुरेश का यह प्रयास एक आदर्श बनता जा रहा है।