छत्तीसगढ़ में एक बार फिर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। करोड़ों की काली कमाई के मामले में आरोपी आशीष शिंदे को पुलिस ने गिरफ्तार तो किया, लेकिन पूछताछ के बाद थाने से ही छोड़ दिया। जबकि उस पर गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज है।
यह पूरा मामला पूर्व मुख्यमंत्री के करीबी माने जाने वाले केके श्रीवास्तव और उनके सहयोगियों से जुड़ा है। वर्ष 2024 में तेलीबांधा थाना में अर्जुन रावत नामक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज करवाई थी कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में ठेका दिलाने के नाम पर उनसे 15 करोड़ की ठगी की गई। इस पर केके श्रीवास्तव, उनके बेटे कंचन श्रीवास्तव, आशीष शिंदे और गोपाल कश्यप पर धारा 420, 467, 468, 471 और 120-बी के तहत FIR दर्ज हुई थी।
FIR दर्ज होते ही सभी आरोपी फरार हो गए थे और पुलिस की टीमें लगातार तलाश कर रही थीं। जांच के दौरान सामने आया कि ठगी की रकम से जुड़े बैंक खातों में 441 करोड़ रुपये से अधिक की ब्लैक मनी का लेनदेन हुआ है। डिजिटल ऑडिट में मनी लॉन्ड्रिंग और महादेव सट्टा ऐप से संबंधों की भी पुष्टि हुई, जिससे आरोप और भी गंभीर हो गए।
सूत्रों का कहना है कि आरोपी आशीष ने 27 जून को कोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी लगाई और पुलिस ने 28 जून को उसे हिरासत में लिया। लेकिन अगले ही दिन पूछताछ के बाद उसे थाने से छोड़ दिया गया। इससे साफ है कि पुलिस ने कोर्ट में उसकी जमानत याचिका मजबूत करने का मौका दिया।
इतना ही नहीं, आशीष की संपत्ति में पिछले पांच सालों में जबरदस्त इजाफा देखा गया है। वह महंगी कारों में घूमता है और कहा जा रहा है कि उसने कुछ अफसरों की कमाई को भी जमीन में इन्वेस्ट कराया है। पंडरी थाने में भी उसके खिलाफ एक अन्य धोखाधड़ी का मामला दर्ज है, जिसमें वह फिलहाल जमानत पर है।
अब जब 30 जून को अग्रिम जमानत की सुनवाई होनी है, तब आरोपी को थाने से रिहा किया जाना पुलिस की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। दूसरी ओर, इस मामले पर न तो सीएसपी अजय कुमार और न ही अन्य वरिष्ठ अधिकारी कोई प्रतिक्रिया देने को तैयार हैं। इससे यह आशंका और गहरी हो रही है कि कहीं पूरा तंत्र आरोपी को बचाने में तो नहीं जुटा है।