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स्कूल बसों की अनदेखी पर आरटीओ सख्त, चेताया- नहीं सुधरे तो ब्लैकलिस्ट

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स्कूल बसों की अनदेखी पर आरटीओ सख्त, चेताया- नहीं सुधरे तो ब्लैकलिस्ट

तीसरी बार का अल्टीमेटम, अब भी फिटनेस जांच में लापरवाही बरती तो कार्रवाई तय

रायगढ़। जिले में स्कूल बसों की फिटनेस को लेकर परिवहन विभाग सख्त हो गया है। लगातार दो बार फिटनेस शिविर आयोजित करने के बावजूद कई स्कूलों की बसें जांच में नहीं पहुंची हैं। इस लापरवाही पर आरटीओ ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित स्कूलों और परिवहन कंपनियों को नोटिस जारी किया है। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि तीसरे मौके पर भी बसें फिटनेस जांच के लिए नहीं आतीं, तो उन्हें अनफिट मानकर ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा।

लगातार नजरअंदाजी कर रहे स्कूल प्रबंधन और ट्रांसपोर्टर

नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन अधिकांश स्कूल प्रशासन और ट्रांसपोर्ट एजेंसियां छात्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं दिख रही हैं। बिना फिटनेस जांच कराए बसों का संचालन शुरू कर दिया गया है। जबकि अधिकांश स्कूलों द्वारा ट्रांसपोर्ट फीस पहले ही वसूल ली जाती है।

पहला फिटनेस शिविर स्कूल सत्र शुरू होने से पहले लगाया गया था, जहां गिनती के ही स्कूलों ने अपनी बसें भेजीं। 21 जून को दूसरा कैंप हुआ, फिर भी कई स्कूल अनुपस्थित रहे। अब तीसरे और अंतिम शिविर का आयोजन किया गया है।

कई स्कूलों की बसें अब तक नहीं पहुंची जांच में

जानकारी के अनुसार जिन स्कूलों की बसें फिटनेस जांच में नहीं पहुंचीं, उनमें डीपीएस ज्ञानधरा, अशोका पब्लिक स्कूल सारंगढ़, जानकी कॉलेज, कैरियर एकेडमिक, भारतमाता स्कूल, एरिसेंट स्कूल, रेनबो इंग्लिश मीडियम, लीटिल लावर, शोभा शिक्षण समिति, जेएमजे मॉर्निंग स्टार, उन्नायक सेवा संस्थान, गोविंदराम बानी शिक्षण समिति, टीकाराम और महेश्वर शिक्षण समिति शामिल हैं।

निजी ट्रांसपोर्ट कंपनियों को भी चेतावनी

कई स्कूल ट्रांसपोर्ट व्यवस्था का ठेका निजी एजेंसियों को सौंप देते हैं, जिनमें प्रमुख नाम इंडिगो ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन और महादेव ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन हैं। इन एजेंसियों को भी नोटिस जारी कर आखिरी मौका दिया गया है कि वे निर्धारित शिविर में अपनी बसें फिटनेस जांच के लिए प्रस्तुत करें।

अधिकारी का बयान

अमित कश्यप, जिला परिवहन अधिकारी ने कहा:
“हमने दो बार स्कूल बसों के लिए फिटनेस शिविर आयोजित किया, लेकिन कई बसें नहीं आईं। तीसरी बार फिर मौका दिया गया है। अगर अब भी कोई वाहन जांच में नहीं आता, तो उसे अनफिट मानते हुए ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा।”

निष्कर्ष

छात्रों की सुरक्षा के लिहाज से यह मामला बेहद गंभीर है। यदि स्कूल प्रबंधन और ट्रांसपोर्ट कंपनियां लापरवाही बरतती हैं, तो सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है। अब देखना होगा कि तीसरे मौके पर कितनी बसें जांच के लिए आती हैं।