छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में झूठे पाॅक्सो केस में फंसाने वालों पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। दरअसल, एक नाबालिग लड़की के माध्यम से दरगाह के खादिम मोहम्मद नईम रिजवी पर छेड़छाड़ का फर्जी आरोप लगाकर उनकी छवि खराब करने की साजिश रची गई थी। इस मामले में जांच के बाद हाईकोर्ट और जिला अदालत ने खादिम को क्लीन चिट दी और झूठा केस दर्ज कराने वालों पर कार्रवाई के निर्देश दिए।
कोर्ट के आदेश पर सिविल लाइन पुलिस ने मास्टरमाइंड अब्दुल कय्यूम समेत चार लोगों – खैरूनिशा, हमीदा और महेसर – के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की 13 धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। इनमें संगठित अपराध की धाराएं भी शामिल हैं।
क्या था मामला?
20 सितंबर 2020 को अब्दुल कय्यूम ने मोहम्मद नईम रिजवी पर 12 साल की बच्ची से छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी। इस पर पुलिस ने IPC की धारा 354 और POCSO एक्ट की धारा 8 के तहत केस दर्ज किया था। लेकिन जांच में घटनास्थल के CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्य से आरोप गलत पाए गए।
बाद में नाबालिग लड़की ने जांच के दौरान खुलासा किया कि उसने अब्दुल कय्यूम के कहने पर झूठी शिकायत की थी। इसके बाद पुलिस ने झूठे केस दर्ज कराने के मामले में एफआईआर दर्ज की। आरोपी अब्दुल कय्यूम पर पहले से सट्टेबाजी और अवैध हथियार रखने के मामले भी दर्ज हैं।
राजधानी रायपुर में पहली बार ऐसा मामला
यह रायपुर में अपनी तरह का पहला मामला है, जहां झूठा POCSO केस दर्ज कराने पर संगठित अपराध की धाराओं में एफआईआर की गई है। इस केस से यह संदेश साफ है कि कानून का गलत इस्तेमाल करने वालों पर अब सख्त कार्रवाई होगी।