Home Chhattisgarh news रायपुर में दुर्लभ ट्रेकियल स्टेनोसिस सर्जरी सफल, नाक की हड्डी से दोबारा बनी श्वास नली की दीवार

रायपुर में दुर्लभ ट्रेकियल स्टेनोसिस सर्जरी सफल, नाक की हड्डी से दोबारा बनी श्वास नली की दीवार

0
रायपुर में दुर्लभ ट्रेकियल स्टेनोसिस सर्जरी सफल, नाक की हड्डी से दोबारा बनी श्वास नली की दीवार

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्थित पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय एवं उससे संबद्ध डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मृति अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने एक अत्यंत जटिल और दुर्लभ सर्जरी में सफलता हासिल की है। मरीज को सबग्लोटिक स्टेनोसिस (Subglottic Stenosis) की समस्या थी, जिसमें सांस नली में गंभीर संकुचन आ जाता है। डॉक्टरों ने ट्रेकियोप्लास्टी विद एंटीरियर ट्रेकियल वॉल रिकंस्ट्रक्शन नामक सर्जरी कर मरीज की जान बचाई। खास बात यह रही कि ट्रेकिया (windpipe) की दीवार को नाक के सेप्टल कार्टिलेज (नाक की हड्डी) से फिर से बनाया गया।

इस जटिल ऑपरेशन को ईएनटी, प्लास्टिक सर्जरी और रेडियोडायग्नोसिस विभागों की विशेषज्ञ टीम ने मिलकर दो चरणों में अंजाम दिया।

मरीज की स्थिति और उपचार का सिलसिला

बिलासपुर निवासी 36 वर्षीय मरीज को सितंबर 2024 में सिम्स, बिलासपुर में Ascending Colon Perforation का इलाज मिला था। इलाज के कुछ सप्ताह बाद उसे सांस लेने में तकलीफ हुई और ट्रेकियोस्टॉमी करनी पड़ी। दो महीने बाद ट्यूब हटाकर घाव बंद कर दिया गया, पर मरीज को दोबारा सांस लेने में समस्या होने लगी। जाँच में पता चला कि वह ट्रेकियल स्टेनोसिस से ग्रस्त हो गया है। इसके बाद मरीज को रायपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।

दो चरणों में हुई सर्जरी

पहला चरण:

24 दिसंबर 2024 को डॉ. मान्या रॉय ने री-डू ट्रेकियोस्टॉमी कर मरीज का वायुमार्ग फिर से खोला। CECT स्कैन में सामने आया कि मरीज की श्वास नली में 2.4 सेंटीमीटर लंबा संकुचन और 7 मिमी की पूर्ण स्टेनोसिस थी।

दूसरा चरण:

16 मई 2025 को ट्रेकियोप्लास्टी विद एंटीरियर ट्रेकियल वॉल रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी की गई, जिसमें नाक की हड्डी का प्रयोग कर ट्रेकिया की दीवार दोबारा बनाई गई।

इस सर्जरी को अंजाम देने वाली टीम में शामिल रहे:

डॉ. दक्षेश शाह (एचओडी, प्लास्टिक सर्जरी)

डॉ. वर्षा मुंगुटवार (प्रोफेसर, ईएनटी)

डॉ. मान्या रॉय, डॉ. प्रोनब, डॉ. सुमन दास

एनेस्थीसिया टीम: डॉ. जया लालवानी, डॉ. रश्मि नायक, डॉ. मंजू टंडन, डॉ. शाहिदा, डॉ. शशांक

रेडियोलॉजिस्ट: डॉ. विवेक पात्रे, डॉ. विभा पात्रे

सर्जरी के बाद की स्थिति

26 मई को पुन: जांच के दौरान मरीज का ओरल ईटी ट्यूब हटाया गया, नाक के रास्ते से इंटुबेशन किया गया और घाव की सिलाई की गई। अब मरीज ट्रेकियोस्टॉमी के बिना सामान्य रूप से सांस ले रहा है, बातचीत कर पा रहा है और पूर्ण रूप से स्वस्थ है।

चिकित्सकीय उपलब्धि

डॉक्टरों के अनुसार सबग्लोटिक स्टेनोसिस एक जटिल और बार-बार उभरने वाली स्थिति होती है। लेकिन इस केस में ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा। मरीज अब नियमित फॉलोअप पर है और सामान्य जीवन जी रहा है। यह रायपुर के शासकीय मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि जब विशेषज्ञता, समर्पण और टीमवर्क साथ आते हैं, तो सबसे जटिल बीमारियों का भी समाधान संभव होता है।