प्रदेश में सरकारी दफ्तरों में लागू पांच दिवसीय कार्य प्रणाली को लेकर अब सरकार पुनर्विचार कर रही है। कांग्रेस शासनकाल में शुरू की गई यह व्यवस्था अब समाप्त की जा सकती है। सूत्रों के अनुसार, शासन स्तर पर इस व्यवस्था को खत्म करने का निर्णय लगभग ले लिया गया है, हालांकि इसे अभी लागू नहीं किया गया है क्योंकि राज्य में फिलहाल सुशासन तिहार मनाया जा रहा है।
कर्मचारियों में नाराजगी की आशंका
सरकार को आशंका है कि अगर यह निर्णय तुरंत लागू किया गया, तो कर्मचारियों में असंतोष फैल सकता है। इससे विरोध प्रदर्शन, हड़ताल और दफ्तरों में कामकाज ठप होने की स्थिति बन सकती है। ऐसे में आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, जिससे सरकार की छवि प्रभावित हो सकती है। इसी कारण फिलहाल इस निर्णय को टाल दिया गया है।
जनता और जनप्रतिनिधियों की लगातार शिकायतें
सरकार का यह फैसला जनता और जनप्रतिनिधियों की लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर लिया जा रहा है। लोगों का कहना है कि 5 दिन काम होने के कारण सरकारी सेवाएं बाधित हो रही हैं और आम जनता को समय पर कार्य नहीं मिल पा रहा है।
समय की अनदेखी कर रहे कर्मचारी
पांच दिवसीय कार्य प्रणाली के तहत कर्मचारियों को सुबह 10 बजे से शाम 5:30 बजे तक कार्यालय में रहना अनिवार्य है, लेकिन अधिकतर अधिकारी और कर्मचारी समय का पालन नहीं कर रहे हैं। कुछ ही लोग समय पर आते हैं, जबकि अधिकांश लोग देर से आते हैं और जल्दी चले जाते हैं, जिससे सरकारी कार्य प्रभावित हो रहा है।
इस सब को देखते हुए, सरकार जल्द ही 5-दिवसीय कार्य प्रणाली को समाप्त कर पुनः 6-दिवसीय कार्य प्रणाली लागू कर सकती है, ताकि प्रशासनिक कार्यों में गति लाई जा सके और जनता को बेहतर सेवाएं मिल सकें।