Home Chhattisgarh news रेत माफिया के खूनी खेल का पर्दाफाश, झारखंड पहुंचते ही कई गुना महंगी बिक रही छत्तीसगढ़ की रेत

रेत माफिया के खूनी खेल का पर्दाफाश, झारखंड पहुंचते ही कई गुना महंगी बिक रही छत्तीसगढ़ की रेत

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रेत माफिया के खूनी खेल का पर्दाफाश, झारखंड पहुंचते ही कई गुना महंगी बिक रही छत्तीसगढ़ की रेत

छत्तीसगढ़ में रेत का अवैध कारोबार अब सिर्फ तस्करी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह जानलेवा रूप ले चुका है। राज्य की नदियों में अब पानी के साथ खून भी बह रहा है। हाल ही में आरक्षक शिवबचन सिंह की हत्या ने इस खतरनाक रैकेट की भयावह सच्चाई को उजागर कर दिया है।

छत्तीसगढ़ में ट्रैक्टर भर रेत की कीमत करीब 800 से 1000 रुपये होती है, लेकिन यही रेत जब झारखंड पहुंचती है तो उसकी कीमत 7000 से 8000 रुपये हो जाती है। उत्तर प्रदेश में इसकी दरें और भी ऊंची हैं। इसी भारी मुनाफे के लालच में माफिया इतने बेखौफ हो गए हैं कि अब इंसानी जान भी उनके लिए कोई मायने नहीं रखती।

कानून को ठेंगा, माफिया की मनमानी

झारखंड सीमा से लगे कन्हर नदी क्षेत्र में गढ़वा जिले के धुरकी और आसपास के गांवों में रेत तस्कर लंबे समय से सक्रिय हैं। इस अवैध कारोबार को स्थानीय नेताओं, अधिकारियों और कुछ जनप्रतिनिधियों का संरक्षण प्राप्त है। माफिया अब छत्तीसगढ़ की कानून व्यवस्था को खुली चुनौती दे रहे हैं।

रेत तस्करी बना अपराध का उद्योग

अविभाजित सरगुजा जिले की कन्हर और रेण नदियों से प्रतिदिन 1000 से 1500 ट्रैक्टर रेत निकाली जाती है, जिसे झारखंड, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश तक पहुंचाया जाता है। यह अब सिर्फ तस्करी नहीं, बल्कि संगठित अपराध का एक इंडस्ट्रियल मॉडल बन चुका है।

झारखंड में चार आरोपी गिरफ्तार

शिवबचन सिंह की हत्या के मामले में झारखंड पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है:

आरीफूल हक (खाला टोला, सेराजनगर, थाना धुरकी, जिला गढ़वा)

जमील अंसारी (खाला टोला, सेराजनगर, थाना धुरकी, जिला गढ़वा)

शकील अंसारी (खाला टोला, सेराजनगर, थाना धुरकी, जिला गढ़वा)

अकबर अंसारी (अरसली, थाना भवनाथपुर, जिला गढ़वा)

इनके पास से दो ट्रैक्टर भी जब्त किए गए हैं। यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि रेत का अवैध धंधा अब एक खूनी खेल बन चुका है, जिसे रोकने के लिए कड़े और प्रभावी कदम उठाना बेहद जरूरी है।