राजधानी में लॉकडाउन सोमवार से तीसरी बार बढ़कर 6 मई सुबह तक चलेगा, लेकिन इस बार निश्चित सिस्टम के साथ किराना, फल, सब्जी के साथ ठेलों और गाड़ियों में नॉनवेज भी बिकेगा।

सोमवार को सुबह 6 से दोपहर 2 बजे तक कारोबारी मोहल्लों में जाकर इसकी बिक्री कर सकते हैं। इसके साथ ही निगम ने 10 जोन में वार्डों के अनुसार दुकानदारों की सूची भी जारी कर दी है जिनसे लोग घरों में किराना सामान मंगवा सकते हैं।

इस सूची को वार्डों में चस्पा भी किया जा रहा है। इसके अलावा बड़े डिपार्टमेंटल स्टोर को भी ऑनलाइन किराना सामान डिलीवरी करने की छूट दे दी गई है। ऐसे स्टोर संचालकों ने अपने ग्राहकों को व्हाट्सएप पर इसकी सूचना देने का काम भी शुरू कर दिया गया है। कारोबारियों को छूट दी गई है कि वे खुद या डिलीवरी ब्वॉय के हाथों तय समय तक घरों में सामान पहुंचा सकते हैं।

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लॉकडाउन में पहली बार ऑनलाइन शॉपिंग और फूड डिलीवरी साइट को भी राहत दे दी गई है। अभी तक इन सभी साइट से घरों तक डिलीवरी की अनुमति नहीं थी। लेकिन लोग अब घर पर रहकर अमेजॉन, फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियों से सामान मंगवा सकते हैं। होटल, रेस्तरां, ढाबा भले ही लोगों के लिए बंद रहेंगे, लेकिन जोमेटो-स्विगी जैसे मोबाइल एप से खाना घर में मंगवाया जा सकता है।

होटल वाले दुकान के अंदर से पार्सल बनाकर इन कंपनियों के डिलीवरी ब्वॉय को देंगे। लेकिन इसका समय सुबह 6 से रात 8 बजे तय रहेगा। तय समय के बाद खाने की डिलीवरी नहीं होगी। ऑनलाइन पार्सल और खाने की डिलीवरी से ऐसे लोगों को बड़ी मदद मिलेगी जो बाहर से आए हैं या घरों में अकेले रहते हैं।

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बैंकों में आज से ज्यादा होगा काम

बैंकों में काम करने का दायरा भी बढ़ा दिया गया है। सुबह 10 से दोपहर 1 बजे तक जरूरी सुविधाओं से जुड़े लोग वित्तीय लेन-देन के लिए जा सकेंगे। बैंक अपने न्यूनतम स्टाफ के साथ काम करेगा। लेकिन कोविड मरीज, गर्भवती महिलाओं को आने की मनाही होगी।

बैंकों में स्वास्थ्य सुविधाएं, एटीएम कैश रिफिलिंग, पेट्रोल-डीजल, एलपीजी, पीडीएस, कैरोसिन, उद्योग, मेडिकल ऑक्सीजन, शासकीय लेन-देन के काम हो सकेंगे। मेडिकल इमरजेंसी के दौरान बड़ी रकम की जरूरत होने पर उसे दस्तावेज दिखाकर निकाला भी जा सकेगा। केवल इनसे संबंधित व्यक्ति ही बैंकों में जा सकेंगे। इन लोगों को बाहर से आने-जाने के लिए बैंकों से लिखित में अनुमति लेनी होगी। ताकि जांच के दौरान उस पर्ची को दिखा सकें।

मोहल्लों में जांच के लिए बनी टीमें

तीसरे लॉकडाउन में कारोबारी छूट का गलत फायदा तो नहीं उठा रहे हैं इसकी जांच के लिए सभी 10 जोन में जांच टीम बना दी गई है। निगम, प्रशासन और पुलिस के अधिकारी-कर्मचारियों की यह टीम हर मोहल्ले में जाकर इस बात की जांच करेगी कि कोई भी दुकान न खुलें। केवल ठेलों या गाड़ियों में ही सामान की बिक्री हो सके। इस बार सख्ती भी ज्यादा होगी।

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अब तक दुकानें खोलने पर 15 दिन के लिए सील किया जाता था, लेकिन अब 30 दिनों के लिए दुकानें सील होंगी। अफसरों ने साफ कर दिया है कि किसी भी बाजार, मंडी या थोक-चिल्हर दुकानों को खोलने की अनुमति नहीं दी गई है। इसलिए कोई भी कारोबारी या आम लोग इस तरह के बाजारों में जाकर भीड़ न बढ़ाएं। सूचना के बाद भी पहुंचे ऐसे लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।

रेमडेसिविर इंजेक्शन सीधे भेज रहे हैं अस्पतालों में वे मरीजों को पर्ची देकर बाहर से क्यों मंगवाते हैं ?

राजधानी में रेमडेसिविर इंजेक्शन और ऑक्सीजन की सप्लाई सामान्य करने के लिए अफसरों और निजी अस्पतालों के संचालक वर्चुअल बैठक में एक साथ जुटे। इसमें आला अफसरों ने निजी अस्पतालों के संचालकों की जमकर क्लास लगाई। बैठक की शुरुआत में कलेक्टर ने निजी अस्पतालों के संचालकों से कहा कि जब इंजेक्शन की सप्लाई अस्पतालों में की जा रही है, तो वे पर्ची से लिखकर बाहर से क्यों मंगवा रहे हैं?

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निजी अस्पतालों के संचालकों से कहा गया कि वे अपने अस्पताल की जानकारी पोर्टल में लगातार अपडेट करते रहे। हेल्थ डायरेक्टर नीरज बंसोड ने कहा कि राज्य शासन ने आयुष्मान कार्ड के साथ कोरोना मरीजों के लिए सामान्य बेड, ऑक्सीजन युक्त बेड और आईसीयू बिस्तर का रेट तय कर दिया है। फिर भी ज्यादा रेट लिए जाने की शिकायतें मिल रही हैं।

एंबुलेंस के लिए भी ज्यादा पैसे मांगे जा रहे हैं। शिकायतें यह भी हैं कि पैसों के लिए अस्पताल शव तक रोक रहे हैं। यह गलत है और इन शिकायतों की जांच के लिए टीम बना दी गई है। इस पर रामकृष्ण अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. संदीप दवे ने कहा कि कई बार मरीजों की ओर से अस्पतालों की अनावश्यक शिकायतें की जाती है।

इनकी जांच के लिए दोनों पक्षों को सुना जाना चाहिए, क्योंकि इनसे मेडिकल अमला हतोत्साहित होता है। बैठक में राज्य नोडल अधिकारी हिमशिखर गुप्ता, डॉ. सुनील खेमका, एमएमआई हॉस्पिटल के डॉ नवीन शर्मा आदि मौजूद थे