सिटी न्यूज रायपुर —

आज मेरा मन बहुत दु:खी और आक्रोशित है , यह कहना है जनता कांग्रेस छत्तीसगढ जोगी के रायपुर शहर जिलाध्यक्ष डा . ओमप्रकाश देवांगन का ,, उन्होने  बीजापुर नक्सली हमले में शहीद 22 जवानों को श्रद्धाजंली देते हुवे कहा कि छत्तीसगढ में नक्सली हमला नई बात नही है इसके पहले भी यहां सैकडों जवान शहीद हो चुके है और हजारों निर्दोष जनता की नृशंस हत्या कर चुके है,, यहां तक की हमने भाजपा और कांग्रेस पार्टी के अपने अग्रिम पंक्ति तक के अनेक वरिष्ठ नेताओं को नक्सली हमले में खोया है,,    सत्तापक्ष और विपक्ष एक – दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप करके  राज्य और केन्द्र की सरकारें हर बार नक्सली हमले को कायराना हरकत करार देकर, नक्सली बौखलाहट में हमला कर रहे हैं जैसे बचकानी बयान देकर,  नक्सली हमले की निंदा कर , घायल जवानो से मिलकर और शहीद जवानों को श्रद्धांजली देकर थोडा मुआवजा राशी की घोषणा कर मीडिया में यह कहकर चले जाते है कि हमारे जवानों की शहादत व्यर्थ नही जायेगी, यह घटना नक्सलियों का आखिरी हमला साबित होगा, अब हम नक्सलियों का समूल नाश कर देगें, वगैरह वगैरह, …मंत्री , मुख्यमंत्री ,  केंद्रिय गृह मंत्री और प्रधानमंत्री सहित सत्तापक्ष के सभी जिम्मेदार लोग हर बार यही रटा रटाया बयान देते हैं और बीजापुर हमले में भी यही हुवा…!!

डा. देवांगन ने कहा कि छत्तीसगढ प्रदेश की जनता को तो मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल पर भरोसा नही रहा क्योकिं सरकार बन जाने के बावजूद कांग्रेस के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल अपने वरिष्ठ कांग्रेसियों शहीद विद्याचरण शुक्ल, नंदकुमार पटेल, महेन्द्र कर्मा, योगेन्द्र शर्मा सहित 25 नेताओं / जवानों के शहादत को केवल बरसी में याद कर माल्यार्पण कर बडी बडी भाषण देकर,,  अगले बरसी तक फिर भूल जाते हैं,, सरकार में बैठे कांग्रेस के यही नेता लोग उस समय तत्कालिन भाजपा सरकार को हत्यारी कहकर उनपर दोष मढकर राजनीतिक रोटी सेंककर अपनी सरकार तक बना लिये,, लेकिन आज जब यही कांग्रेसी – राज्य में अपनी खुद की सरकार बन जाने के बावजूद ढाई साल में वरिष्ठ कांग्रेसियों के हत्यारे,  नक्सलियों को मार गिराना तो दूर अभी तक उनकी फाइल नही खोल पायी है,, यही बडी वजह है कि अब छत्तीसगढ की जनता और कांग्रेसियों को भी अपने मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल पर भरोसा नही रहा  !!

श्री भूपेश बघेल अपनी सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री रहते हुवे वरिष्ठ कांग्रेसियों की शहादत का बदला लेते हुवे यदि नक्सलियों का खात्मा कर दिया होता तो आज हमारे 22 जवान शहीद नही होते ,

नपुंसक सरकारों से अब क्या उम्मीद करें,  आगे फिर कोई नक्सली हमला नही होगा यह भी आश्वस्त नही  ,, राष्ट्रवाद की बात करने वाले केंद्रिय गृह मंत्री श्री अमीत शाह और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के बातों पर यदि भरोसा किया जाये, जैसे उन्होंने कई मौके पर चाहे पाकिस्तान हो या चीनी हमला.. उन्ही के घर में घुसकर सभी को मुंहतोड जवाब देकर  देश की जनता का भरोसा जीता है,,  वही अमीत शाह आज छत्तीसगढ प्रवास के दौरान एक लाइन में मीडिया से कहा कि अब हम छत्तीसगढ में  “नक्सलियों का समूल नाश करेगें” ,,  छत्तीसगढ के पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने भी अमित शाह के बयान पर  जनता को आश्वस्त किया है कि अमीत शाह जो बोलते है वो पक्का करके दिखाते हैं ,, एैसा कहकर अमित शाह ने बस्तर में मोर्चा संभाल रहे हमारे सभी जवानों और प्रदेश की जनता का हौसला तो बढ़ाया है,, लेकिन अब देखना यह है कि नक्सलियों का समूल नाश करने की ‘दो टूक’ बात करने वाले अमित शाह अपना वचन कब तक निभाते है या ये भी जिस तरह अपने वरिष्ठ कांग्रेसियों की शहादत पर नक्सलियों से बदला लेने –  खून खौलाने के बजाय उनकी शहादतों को भूल जाने वाले भूपेश बघेल की तरह धोखा साबित होगा  ?

jccj के जिलाध्यक्ष डा. ओमप्रकाश देवांगन ने दोहराया कि प्रदेश सरकार समेत केंद्र के अधिकारी नेता और मंत्री श्रद्धांजलि सभा कर बैठक कर मीडिया को रटा रटाया एक ही जवाब देते हैं कि हमारे जवानों ने डटकर मुकाबला किया, उनका खून व्यर्थ नहीं जाने देंगे, नक्सलियों से बदला लिया जाएगा,
अब यह बदला शब्द सुनते सुनते 20 साल गुजर गए परंतु बदला लेने का वक्त अभी तक नहीं आया क्यों ?

अब छत्तीसगढ की जनता और शहीद जवानों के परिवार केंद्रीय मंत्री अमित शाह एवं प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल से जानना चाहते हैं कि कब उनके परिवारों के खून का बदला नक्सलियों से लिया जाएगा ? और सरकार बदला लेने में पीछे क्यों हट जाती है ?  और वही रटा रटाया जवाब देकर हमारे जख्मों पर नमक क्यों छिड़क रही है ?