मामला – चार बिंदुओं में समझें
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पृष्ठभूमि और कस्टडी विवाद
सैकत बसु और विक्टोरिया बसु की शादी 2017 में हुई थी, और 2020 में उनका बेटा हुआ था। दोनों अलग होने के बाद दिल्ली की फैमिली कोर्ट में कस्टडी विवाद चल रहा था, जिसमें बेटे का समय दोनों के बीच बांटा गया था । -
गायब होने की घटना
पिता का कहना है कि 22 मई से कस्टडी विक्टोरिया के पास थी, और 7 जुलाई से वो और बच्चा अचानक गायब हो गए। 4 जुलाई को विक्टोरिया को रूसी दूतावास में रूसी राजनयिक के साथ पिछले दरवाज़े से जाते देखा गया था । -
जासूसी और राजनयिक संदिग्धता
पिता के अनुसार, विक्टोरिया के पिता रूस की खुफिया सेवा FSB के पूर्व अधिकारी हैं और उन्हें शक है कि वो भारत में “जासूसी” कर रही थी। साथ ही, हो सकता है कि वह किसी रूसी राजनयिक के साथ संबंध में हो, जो राजनयिक सुरक्षा के तहत छिपाव में मदद कर रहा हो । -
सुप्रीम कोर्ट की सख्त रुख
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केंद्र और दिल्ली सरकार को लुकआउट नोटिस जारी करने को कहा गया।
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पासपोर्ट जब्त करने और देश–विदेश आवागमन रोका गया ।
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आप्रवासन, एयरपोर्ट, पोर्ट और सीमा नियंत्रण अधिकारियों को सतर्क रहने का निर्देश दिया गया ।
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साथ ही, जो राजनयिक आरोपी पैठ में शामिल हो सकता है, उसकी रिहायश पर तलाशी की अनुमति पाक हो — लेकिन इस पर सख्त शर्तों के साथ काम करने का निर्देश दिया गया ।
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कोर्ट ने विक्टोरिया की ओर से पेश वकीलों को भी कठोर निर्देश दिए — “आप सब कुछ जानते हैं…हम आपके साथ नहीं खेल सकते…” ।

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क्यों है यह महत्वपूर्ण?
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यह मामला सिर्फ कस्टडी डिस्प्यूट नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर का राजनीतिक और न्यायिक संघर्ष बनता जा रहा है।
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इसमें राजनयिक सुरक्षा, विदेशी एजेंसी से कथित संबंध, और भारतीय राजपत्रित सीमा शामिल है — जिससे यह केवल पारिवारिक विवाद से आगे का मुद्दा बन गया है।

अब आगे क्या होगा?
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दिल्ली पुलिस को तुरंत पिता को बच्चे की कस्टडी दिलवाने के निर्देश दिए गए हैं और अगली सुनवाई 18 जुलाई की है ।
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MEA व MHA को लुकआउट, पासपोर्ट से इन्फॉर्मेशन, एयरपोर्ट और पोर्ट अलर्ट जारी करने को कहा गया है ।
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रूसी दूतावास को सहयोग देने और राजनयिकों की संभावित भूमिका पर जवाब देने की जिम्मेदारी दी गई है ।