Home Chhattisgarh news तोमर बंधुओं की मुश्किलें बढ़ीं: हाईकोर्ट ने संपत्ति कुर्की का आदेश दिया, पेशी की दी अंतिम चेतावनी

तोमर बंधुओं की मुश्किलें बढ़ीं: हाईकोर्ट ने संपत्ति कुर्की का आदेश दिया, पेशी की दी अंतिम चेतावनी

0
तोमर बंधुओं की मुश्किलें बढ़ीं: हाईकोर्ट ने संपत्ति कुर्की का आदेश दिया, पेशी की दी अंतिम चेतावनी

रायपु के कुख्यात हिस्ट्रीशीटर तोमर बंधुओं की परेशानियां अब और बढ़ गई हैं। लगातार फरार चल रहे इन अपराधियों के खिलाफ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। पुलिस की याचिका को मंजूरी देते हुए कोर्ट ने उनकी चार संपत्तियों की कुर्की का आदेश जारी कर दिया है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, हाईकोर्ट ने रायपुर कलेक्टर को इस संबंध में प्रतिवेदन भेजा है। साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अगर वीरेंद्र और रोहित तोमर कल तक कोर्ट में पेश नहीं होते हैं, तो उनकी संपत्तियों पर कुर्की की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

पुलिस बोली- हर हाल में गिरफ्तारी होगी

रायपुर पुलिस का कहना है कि शहर में लंबे समय से सूदखोरी और गुंडागर्दी में लिप्त तोमर बंधुओं को अब किसी भी हाल में गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचाया जाएगा। गौरतलब है कि दोनों भाइयों के खिलाफ विभिन्न थानों में लगभग दर्जनभर मामले दर्ज हैं। हाल ही में तेलीबांधा इलाके में एक प्रॉपर्टी डीलर से मारपीट और हत्या की कोशिश के बाद पुलिस सक्रिय हुई।

पत्नियों और परिजनों पर भी केस

तोमर बंधुओं के अलावा उनकी पत्नियों और भतीजे पर भी पुलिस ने कर्ज वसूली, धमकी, ब्लैकमेलिंग और आर्म्स एक्ट जैसे मामलों में कार्रवाई की है। वर्तमान में दोनों भाई फरार हैं और पुलिस ने उन पर इनाम भी घोषित कर रखा है।

19 साल से अपराध की दुनिया में सक्रिय

  • 2006: कारोबारी पर चाकू से हमला (आजाद चौक)

  • 2010: उगाही और गुंडागर्दी (गुढ़ियारी)

  • 2013: युवक की हत्या (कोतवाली)

  • 2015: महिला से अप्राकृतिक कृत्य (अमलीडीह)

  • 2017: सूदखोरी, गुंडागर्दी, कर्जा एक्ट (भाठागांव)

  • 2018: धोखाधड़ी, सूदखोरी (पुरानी बस्ती)

  • 2019: ब्लैकमेलिंग, आर्म्स एक्ट (कोतवाली)

  • 2024-25: अपहरण, ब्लैकमेलिंग, मारपीट और सूदखोरी के कई मामले (गुढ़ियारी, तेलीबांधा, पुरानी बस्ती)

नेताओं से भी रहे रिश्ते

सूत्र बताते हैं कि वीरेंद्र तोमर के कई बड़े नेताओं से करीबी संबंध रहे हैं। कई मौकों पर वह मंत्रियों और विधायकों के साथ पोस्टरों में नजर आ चुका है। इसी वजह से कर्ज लेने वाले लोग इनके खिलाफ थानों तक जाने से भी डरते थे।

सवालों के घेरे में जांच

इतने गंभीर अपराध दर्ज होने के बावजूद अब तक किसी भी मामले में दोनों को सजा नहीं मिल पाई है। इससे पुलिस की जांच प्रक्रिया और गवाहों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। क्या पुलिस चालान में खामियां रहती हैं या गवाहों को डरा-धमकाकर चुप करा दिया जाता है—यह अब बड़ी पड़ताल का विषय बन चुका है।